
महिला पहलवानों के मामले में कोर्ट सख्त, बृजभूषण सिंह को दिया ‘आखिरी मौका’
Brij Bhushan Sharan Singh Case: महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की एक अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को सख्त निर्देश दिए हैं।
अदालत ने उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते की और मोहलत दी है, लेकिन इसके साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि यह उनके लिए ‘आखिरी मौका’ है। तय समय सीमा में जवाब न देने पर आगे कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
बीते 3 अगस्त को एक मजिस्ट्रेट अदालत ने भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को छह महिला पहलवानों की ओर से दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया था। इस मामले में कई जाने-माने पहलवान शामिल थे।
बृजभूषण सिंह को बरी किए जाने के इस फैसले के खिलाफ चार महिला पहलवानों ने उच्च न्यायालय का रुख किया और 25 सितंबर को इस आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की। पहलवानों का कहना है कि बरी किए जाने का निचली अदालत का फैसला कानूनी रूप से सही नहीं है और यह रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों के ‘चुनिंदा आकलन’ व अटकलों पर आधारित है।
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अदालत की कड़ी चेतावनी
विशेष न्यायाधीश दिग्विजय सिंह की अदालत ने पिछली सुनवाई (9 अक्टूबर) पर भी जवाब देने के लिए समय दिया था और आज की तारीख तय की थी। हालांकि, तय समय पर जवाब दाखिल न किए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए इसे अंतिम अवसर बताया।
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि दलीलें शुरू होने के बाद पूरी कार्यवाही बंद कमरे (In-camera proceedings) में की जाएगी। सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह खुद अदालत में मौजूद थे। इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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