
AIF-FPI निवेशकों की पहचान पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, महुआ मोइत्रा की याचिका खारिज
Mahua Moitra: महुआ मोइत्रा ने SEBI से AIF और FPI के वास्तविक निवेशकों की पहचान सार्वजनिक कराने की मांग की थी।
New Delhi: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा। शीर्ष अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) के वास्तविक मालिकों और निवेश पर नियंत्रण रखने वाले व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा कानूनी और नियामकीय ढांचे के अभाव में अदालत अपने स्तर पर नई व्यवस्था बनाने का निर्देश नहीं दे सकती। पीठ के मुताबिक, याचिका में मांगी गई राहत देने का अर्थ एक नया नियामकीय ढांचा तैयार करना होगा, जिसे संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई करते हुए अदालत के माध्यम से लागू नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने क्या कहा?
इस मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस डीके उपाध्याय की पीठ ने की। पीठ ने कहा कि जब संबंधित विषय पर पहले से कोई कानूनी या नियामकीय व्यवस्था मौजूद नहीं है, तो अदालत नई व्यवस्था तैयार करने का निर्देश नहीं दे सकती।
अदालत ने याचिका में मांगी गई राहत को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसा करना एक नए नियामकीय ढांचे के निर्माण के समान होगा। इस आधार पर महुआ मोइत्रा की याचिका खारिज कर दी गई।
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क्या थी महुआ मोइत्रा की मांग?
महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में SEBI को AIF और FPI के वास्तविक मालिकों तथा निवेश से जुड़े फैसलों पर नियंत्रण रखने वाले व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक करने का निर्देश देने की मांग की थी। इसका उद्देश्य इन निवेश माध्यमों के पीछे मौजूद वास्तविक निवेशकों और नियंत्रण रखने वाले व्यक्तियों की पहचान को सामने लाना था।
AIF यानी अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड ऐसे निवेश फंड होते हैं, जो पारंपरिक निवेश माध्यमों से अलग रणनीतियों के तहत निवेश करते हैं। वहीं, FPI यानी फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स विदेशी निवेशक होते हैं, जो भारतीय शेयर बाजार और अन्य अनुमत वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं।
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संविधान के अनुच्छेद 32 का भी दिया संदर्भ
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अपनी भूमिका का उल्लेख किया। यह अनुच्छेद मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रावधान के तहत ऐसी नई नियामकीय व्यवस्था बनाने का निर्देश नहीं दिया जा सकता, जिसके लिए मौजूदा कानूनी आधार उपलब्ध न हो।
इस फैसले के साथ ही महुआ मोइत्रा की ओर से AIF और FPI के वास्तविक निवेशकों की पहचान सार्वजनिक कराने के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई समाप्त हो गई।
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