KGMU में सालों से चल रहा धर्मांतरण गैंग, STF रिपोर्ट के बाद डॉक्टरों पर एक्शन की तैयारी

Lucknow KGMU: राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में लंबे समय से सक्रिय धर्मांतरण और महिला चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों के उत्पीड़न के गंभीर मामलों में उत्तर प्रदेश विशेष कार्यबल (STF) की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।

एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने केजीएमयू प्रशासन को पत्र जारी कर चिन्हित डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने और सख्त कानूनी व अनुशासनात्मक कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

एसटीएफ जांच में खुला गिरोह का राज

उत्तर प्रदेश यूथ एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवम श्रीवास्तव की शिकायत पर एसटीएफ द्वारा कराई गई विस्तृत जांच में पाया गया कि केजीएमयू परिसर के भीतर धर्मांतरण और उत्पीड़न का एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा था। एसटीएफ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले के तार केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग, गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी सहित कई अन्य प्रमुख विभागों से जुड़े हुए हैं।

जांच में पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक (जो जनवरी 2026 में गिरफ्तार हुआ था) के अलावा कई अन्य डॉक्टरों, संविदा कर्मियों और नर्सिंग स्टाफ की संदिग्ध भूमिका की पुष्टि हुई है।

डॉक्टरों पर लगे गंभीर आरोप

एसटीएफ की रिपोर्ट में केजीएमयू के कुछ विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ प्रोफेसरों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि पीड़ित महिला रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा जब उत्पीड़न और दबाव की शिकायत की गई, तो वरिष्ठ अधिकारियों ने उस पर उचित कार्रवाई करने के बजाय मामलों को दबाने का प्रयास किया।

कई मामलों में पीड़ित महिला डॉक्टरों को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताकर उनकी शिकायतों को खारिज करने और आरोपियों को प्रशासनिक संरक्षण देने की बात रिपोर्ट में दर्ज की गई है। इसके अलावा, जांच में ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम के एक संदिग्ध समूह से कुछ डॉक्टरों के सीधे जुड़ाव की बात भी सामने आई है।

शासन का कड़ा आदेश

चिकित्सा शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में केजीएमयू रजिस्ट्रार और कुलपति को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि एसटीएफ रिपोर्ट में नामजद सभी कर्मियों के खिलाफ ‘केजीएमयू एक्ट 2002’ और ‘केजीएमयू स्टैट्यूट्स 2011’ के प्रावधानों के तहत त्वरित कार्रवाई की जाए। केजीएमयू की विशाखा समिति भी अपनी आंतरिक जांच में मुख्य आरोपी को दोषी पा चुकी है।

शासन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से की गई पूरी कार्रवाई का विस्तृत विवरण (Action Taken Report) जल्द से जल्द सरकार को प्रेषित करने को कहा है, जिससे दोषी डॉक्टरों और कर्मचारियों पर बर्खास्तगी समेत अन्य विधिक गाज गिरना तय माना जा रहा है।

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