
ED की अरेस्टिंग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आजम खान, अदालत सुनवाई पर सहमत
Azam Khan Supreme Court News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान (Azam Khan) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कथित ‘डूअल पैन कार्ड’ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद रामपुर जेल से रिहा होते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई नई गिरफ्तारी को आजम खान ने देश की सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए मामले को इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की है।
जल्द सुनवाई की मांग
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant), जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष आजम खान के वरिष्ठ वकील निजाम पाशा ने याचिका का उल्लेख (Mention) करते हुए अति-शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया।
वकील निजाम पाशा ने तर्क दिया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत और 10 साल की सजा पर रोक के बाद जब 31 अक्टूबर को आजम खान रामपुर जेल से बाहर आए, तो उसके महज 40 मिनट के भीतर ही ईडी ने उन्हें नए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिरासत में ले लिया। पीठ ने दलीलें सुनने के बाद तत्काल सुनवाई का आदेश देने के बजाय आश्वासन दिया कि यह याचिका इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की जाएगी।
न्यायिक हिरासत में हैं आजम खान
इससे पहले रविवार को ईडी की टीम ने आजम खान को गाजियाबाद स्थित विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत में पेश किया था। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए सपा नेता को 13 नवंबर तक के लिए 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। कोर्ट में पेशी के दौरान जब पत्रकारों ने गाड़ी की खिड़की खोलकर उनसे प्रतिक्रिया मांगी, तो शांत दिख रहे आजम खान ने निराश भाव से कहा, “अब क्या रह गया है बोलने को?”
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संपत्ति कुर्की से जुड़ा है मामला
प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी (Mohammad Ali Jauhar University) के निर्माण के लिए सरकारी फंड का दुरुपयोग किया गया और फर्जी स्रोतों के जरिए करोड़ों रुपये दान के रूप में डायवर्ट किए गए।
ईडी इससे पहले 28 अक्टूबर को ही जौहर यूनिवर्सिटी की 1,170 करोड़ रुपये की बाजार मूल्य वाली जमीनों और इमारतों को कुर्क कर चुकी है। आजम खान ने अपनी याचिका में 1 नवंबर को विशेष अदालत द्वारा दिए गए 14 दिन की न्यायिक हिरासत के आदेश को रद्द करने और हिरासत से तत्काल रिहा किए जाने की मांग उठाई है।
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