
लालू प्रसाद यादव से मिलने पहुंचीं सोनिया गांधी, ताजा हुईं पुराने दौर की यादें
Lalu Yadav Sonia Gandhi Meeting: भारतीय राजनीति के दो दिग्गज नेताओं की मुलाकात ने एक बार फिर पुराने राजनीतिक समीकरणों और रिश्तों की गर्माहट को ताजा कर दिया है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) से उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की।
स्वास्थ्य लाभ ले रहे लालू यादव से मिलने पहुंचीं सोनिया गांधी की इस शिष्टाचार भेंट के दौरान बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) भी वहां मौजूद रहे। इस मुलाकात ने दोनों नेताओं के बीच करीब तीन दशक पुराने राजनीतिक संबंधों और खास तालमेल की यादों को एक बार फिर पन्नों पर ला दिया है।
लालू ने साझा कीं पुरानी यादें
मुलाकात के बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तस्वीरें साझा करते हुए अपने पुराने राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने लिखा कि सोनिया गांधी के साथ बातचीत के दौरान यूपीए (UPA) सरकार के दौर की कई पुरानी यादें ताजा हो गईं।
आदरणीय मैडम श्रीमती सोनिया गांधी जी ने आवास पहुँच स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त की। इस दौरान पुराने दिनों की यादें ताजा हुई।
स्मरण किया कि कैसे UPA सरकार के दिनों में हम लोगों ने युवाओं, किसानों, जवानों और आम आदमी के लिए पारदर्शी व जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की तथा मनरेगा, RTE, RTI जैसी कानूनों से देशवासियों को सशक्त किया गया। सरदार मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व में बिहार के विकास के लिए हम लोगों ने कैसे 1 लाख 45 हज़ार करोड़ से अधिक की धनराशि दी।
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd) November 2, 2026
लालू ने विशेष रूप से मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए बताया कि उस दौरान देश के आम नागरिकों, युवाओं, किसानों और गरीबों के कल्याण के लिए कई पारदर्शी कानून और योजनाएं लाई गईं। इसके साथ ही, उन्होंने यूपीए शासनकाल में बिहार के विकास के लिए मिले एक लाख 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक के सहयोग को भी रेखांकित किया।
संकट के समय लालू ने दिया था सोनिया का साथ
सोनिया गांधी और लालू प्रसाद यादव के बीच का राजनीतिक रिश्ता भारतीय राजनीति में स्थिरता और आपसी भरोसे का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है। नब्बे के दशक के उत्तरार्ध से शुरू हुए इस सियासी सफर में दोनों ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण वर्ष 1999 में देखने को मिला था, जब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और विदेशी मूल के मुद्दे पर आंतरिक कलह शुरू हुई थी और कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी से अलग राह चुन ली थी।
उस मुश्किल दौर में लालू प्रसाद यादव उन चुनिंदा और प्रमुख क्षेत्रीय क्षत्रपों में शामिल थे, जिन्होंने खुलकर सोनिया गांधी का समर्थन किया था।
वैचारिक राजनीति ने जोड़े रखा
समय-समय पर क्षेत्रीय स्तर पर सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीतियों को लेकर आरजेडी और कांग्रेस के बीच मतभेद या तनातनी जरूर सामने आती रही है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व स्तर पर दोनों के रिश्ते कभी नहीं डगमगाए।
वैचारिक रूप से धर्मनिरपेक्षता और साम्प्रदायिक ताकतों के विरोध की साझा सोच ने इन दोनों दलों को हमेशा एक मजबूत मंच पर जोड़े रखा है। साल 2004 में यूपीए-1 की सरकार बनने के बाद लालू प्रसाद यादव ने केंद्र सरकार में बतौर रेल मंत्री अहम भूमिका निभाई थी और गठबंधन के सबसे भरोसेमंद स्तंभों में गिने जाते थे।
कानूनी और व्यक्तिगत लड़ाइयों के दौर में भी दोनों दलों के बीच का राजनीतिक तालमेल बरकरार रहा है, जो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भी विपक्षी एकजुटता के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।





