US राष्ट्रपति ट्रंप ने दिए और अधिक सैन्य कार्रवाई के संकेत, कहा- ‘अगर जरूरत पड़ी तो…’

Donald Trump On Iran: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मध्य पूर्व के तनाव के बीच ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ भविष्य में और अधिक सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान जब उनसे सैन्य विकल्पों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि इसका परिणाम सभी को जल्द ही पता चल जाएगा।

व्हाइट हाउस में ट्रंप का बड़ा बयान

व्हाइट हाउस में मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि हालांकि उनकी प्राथमिकता क्षेत्र में और अधिक तबाही को टालना है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर वे कड़े कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

ट्रंप ने कहा, “यदि संभव हो तो मैं देश के बाकी हिस्सों को बर्बाद नहीं करना चाहूंगा, लेकिन हालात को देखते हुए शायद मुझे ऐसा करना पड़े। आपको इसके बारे में जल्द ही पता चल जाएगा।”

हालांकि, उन्होंने किसी नए आसन्न हमले की कोई निश्चित समय-सीमा या विशिष्ट लक्ष्यों की घोषणा नहीं की है, लेकिन यह जरूर साफ कर दिया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रमों और गतिविधियों पर अमेरिकी प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।

डेमोक्रेट्स ने उठाई आवाज

दूसरी ओर, अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में ट्रंप प्रशासन के इस आक्रामक रुख को लेकर विरोध भी शुरू हो गया है। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में विपक्षी डेमोक्रेट्स ने अपनी विदेश नीति का नया एजेंडा तैयार करना शुरू कर दिया है।

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेट नेता ग्रेगरी मीक्स ने हाल ही में अपने सहयोगियों को पत्र लिखकर कहा है कि वे राष्ट्रपति के ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष को तुरंत समाप्त करने के लिए संसद में एक बाध्यकारी प्रस्ताव लाएंगे। डेमोक्रेट्स का यह भी प्रयास है कि अमेरिकी विदेश नीति और व्यापारिक फैसलों में कांग्रेस की संवैधानिक भूमिका को पूरी तरह से बहाल किया जाए।

इसके अलावा, डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने प्रशासन से यह सवाल भी पूछा है कि इस सैन्य अभियान की एग्जिट स्ट्रेटेजी (Exit Strategy) क्या है और इसमें अमेरिकी खजाने से कितना खर्च आ रहा है।

वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर मंडरा रहा संकट

मध्य पूर्व के इस भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर पड़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र का होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया भर के तेल परिवहन के लिए एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मार्ग है।

इस मार्ग से होने वाली तेल आपूर्ति पर भारत, चीन और जापान जैसे प्रमुख एशियाई देश बड़े पैमाने पर निर्भर हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू ईंधन बाजारों पर लगातार दबाव बना हुआ है, जिस पर दुनियाभर के निवेशकों की नजर टिकी हुई है।

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