बजट में सरकार की बड़ी सौगात, सस्ती होगी शराब?

Budget 2024: देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2024-25 का पूर्ण बजट पेश कर चुकी हैं. अब बजट बाद के विश्लेषण से पता चलता है कि सरकार ने बजट में एक ऐसा प्रावधान किया है, जो देशभर में शराब की कीमतों को कम कर सकता है. पढ़ें ये खबर…

Budget 2024 में केंद्रीय जीएसटी कानून में बदलाव करके एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (Extra Neutral Alcohol (ENA) को जीएसटी के दायरे से बाहर कर दिया गया। इसका असर शराब उत्पादन की लागत और कीमत पर पड़ेगा। लागत कम होने से शराब की कीमतें घट सकती हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 का पूर्ण बजट पेश करते हुए इनकम टैक्स की न्यू रिजीम में कई अहम बदलाव किए हैं. जहां एक तरफ स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट बढ़ाई गई है, वहीं टैक्स स्लैब में भी बदलाव किया गया है. अब मिडिल क्लास के लिए ये भले उम्मीद के मुताबिक ना हो, लेकिन सरकार ने इसका गम भुलाने की व्यवस्था कर दी है. बजट में एक ऐसा बदलाव हुआ है, जो देशभर में शराब की कीमतों को कम कर सकता है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जब बजट भाषण पेश किया, जो डायरेक्ट टैक्स (इनकम टैक्स) के साथ कई इनडायरेक्ट टैक्स (सीमा शुल्क और जीएसटी इत्यादि) की भी बात की. बस इसी में एक प्रावधान ऐसा है, जो शराब को सस्ता बनाएगा.

खत्म होगा एक्स्ट्रा न्यूट्रल एल्कोहल TAX?

एल्कोहॉलिक बेवरेजेस बनाने में एक जरूरी पदार्थ इस्तेमाल होता है, जिसे ENA यानी एक्स्ट्रा न्यूट्रल एल्कोहल कहा जाता है. सरकार ने सेक्शन-9 में संशोधन करके इसे अब केंद्रीय जीएसटी के दायरे से बाहर कर दिया है. इतना ही नहीं, इसके लिए सीजीएसटी (CGST) के साथ-साथ सरकार ने इंट्रीग्रेटेड जीएसटी (IGST)और यूनियन टेरिटरी जीएसटी (UTGST) में भी जरूरी बदलाव करने की बात कही है.

ENA पर टैक्स खत्म

अब आप सोच रहे होंगे कि ईएनए पर टैक्स खत्म करने से आम आदमी को मिलने वाली शराब की कीमत कम कैसे होगी, तो आपको बता दें कि जीएसटी कानून में ये प्रावधान है कि अगर सरकार किसी वस्तु पर जीएसटी टैक्स में कमी करती है, तो उसका लाभ जनता तक पहुंचाना कानूनन अनिवार्य है.

अब अगर सरकार ईएनए पर टैक्स को हटा देती है, तो शराब बनाने वाली कंपनियों की लागत में गिरावट आएगी. इसका फायदा ग्राहकों को ट्रांसफर किया जा सकता है. हालांकि ये पूरी तरह राज्य सरकारों पर निर्भर करता है, क्योंकि शराब पर टैक्स राज्य सरकारों के दायरे में भी आता है. ऐसे में वह इस पर एक्स्ट्रा टैक्स भी लगा सकती हैं या जितना टैक्स केंद्र सरकार ने घटाया है, उतना ही टैक्स लगाकर शराब की कीमतों को यथावत रख सकती हैं.

हालांकि, यह एकमात्र पहलू नहीं है जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि अभी भी, अधिकांश मूल्य उस राज्य द्वारा शासित होगा जहां इसे बेचा जाता है। इसका असर शराब उत्पादन की लागत और कीमत पर पड़ेगा। लागत कम होने से शराब की कीमतें घट सकती हैं। इसको लेके सरकार की तरफ से कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है.

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