
आज CJI चंद्रचूड़ का लास्ट वर्किंग डे, AMU मामले पर ले सकते हैं सुप्रीम फैसला
Aligarh Muslim University: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ शुक्रवार को रिटायर हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के अल्पसंख्यक दर्जे पर ऐतिहासिक फैसला सुना सकता है।
Aligarh Muslim University: सुप्रीम कोर्ट आज यानी शुक्रवार को इस बात पर अपना फैसला सुनाएगा कि उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) को संविधान के आर्टिकल 30 के तहत माइनोरिटी स्टेटस मिलता है या नहीं. जिसके जरिए माइनोरिटी को यह अधिकार है कि वह अपना एजुकेशन इंस्टिट्यूट खोल सकें। इस बेंच की अध्यक्षता सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ करेंगे. आज यानी 8 नवंबर को इनका लास्ट वर्किंग डे है. ऐसे में माना जा रहा कै सीजेआई इस मामले पर कोई अहम फैसला ले सकते हैं।
4 जजों का फैसला एक,3 का अलग
एएमयी के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला पढ़ा जा रहा है। इस मु्द्दे पर 4 जजों का एक मत है तो वहीं 3 जज ऐसे हैं जो इसके खिलाफ है।मुख्य न्यायाधीश ने खुद, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, जस्टिस जेडी पार्डीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा के साथ मिलकर बहुमत का फैसला लिखा।जबकि न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने असहमति का फैसला दिया। इस मामले को 7 जजों की बेंच सुन रही थी।
क्या है पूरा मामला?
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी फैसला सुनाया था। 1967 में एस अजीज बाशा बनाम भारत संघ के मामले में 5 जजों की संविधान पीठ ने माना कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। पीठ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अधिनियम 1920 का हवाला दिया। इस अधिनियम के तहत ही विश्वविद्यालय की स्थापना की और माना कि एएमयू न तो मुस्लिम समुदाय द्वारा स्थापित किया गया था और न ही मुस्लिम समुदाय द्वारा प्रशासित था। 1981 में AMU अधिनियम में संशोधन में कहा गया था कि विश्वविद्यालय ‘भारत के मुसलमानों द्वारा स्थापित’ किया गया था। इसके बाद 2005 में अल्पसंख्यक दर्जे का दावा करते हुए विश्वविद्यालय ने मुस्लिम छात्रों के लिए स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में 50% सीटें आरक्षित कीं।
आज के फैसले के बाद, यह देखा जाएगा कि AMU का भविष्य क्या होगा और क्या यह अपने आरक्षण और अन्य नीतियों में बदलाव करेगा. इस फैसले से न केवल AMU के भविष्य को आकार मिलेगा, बल्कि यह अन्य संस्थानों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगा, जो अल्पसंख्यक संस्थान होने का दावा करते हैं।





