
CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स में दिखेगा भारत का जलवा, वेटलिफ्टिंग और बॉक्सिंग से उम्मीदें
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games 2026) का आयोजन इस बार स्कॉटलैंड के ग्लास्गो (Glasgow) शहर में होने जा रहा है। वित्तीय बाधाओं और बजट की पाबंदियों के कारण इस बार के गेम्स को काफी संक्षिप्त (Scaled-down) किया गया है और इसमें केवल 10 खेलों को ही शामिल किया गया है।
बावजूद इसके, खेल विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय दल एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए 25 से 28 पदक अपने नाम कर सकता है, जिसमें वेटलिफ्टिंग (Weightlifting) और बॉक्सिंग (Boxing) का सबसे बड़ा योगदान रहने की उम्मीद है।
खेलों की कटौती से भारत को नुकसान
आयोजकों द्वारा इस बार कुश्ती (Wrestling), बैडमिंटन, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे पारंपरिक खेलों को हटा दिया गया है, जो पिछले बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की झोली में सबसे ज्यादा पदक डालते थे।
पिछले बर्मिंघम खेलों में भारत ने जितने पदक जीते थे, उनमें से लगभग आधे पदक उन खेलों से आए थे जिन्हें इस बार हटा दिया गया है। कुश्ती और बैडमिंटन जैसे खेलों के हटने के बाद अब भारत का पूरा दारोमदार वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग और एथलेटिक्स पर टिक गया है।
इन खिलाड़ियों पर रहेंगी देश की निगाहें
ग्लास्गो में भारतीय दल की अगुवाई देश के शीर्ष और अनुभवी खिलाड़ी कर रहे हैं, जिन पर गोल्ड मेडल दिलाने का सबसे बड़ा दबाव और भरोसा होगा:
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मीराबाई चानू (वेटलिफ्टिंग): टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता और स्टार वेटलिफ्टिंग खिलाड़ी मीराबाई चानू महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में भारत की सबसे मजबूत और भरोसेमंद गोल्ड मेडल की दावेदार हैं।
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लवलीना बोरगोहाईं (बॉक्सिंग): ओलंपिक मेडलिस्ट लवलीना पहले ही सेमीफाइनल में पहुंचकर भारत के लिए शुरुआती पदक पक्का कर चुकी हैं।
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नीरज चोपड़ा (एथलेटिक्स): स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा पर भी देश की नजरें टिकी होंगी, जो एक बार फिर पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल करने उतरेंगे।
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जैस्मीन लंबोरिया (बॉक्सिंग): महिला मुक्केबाजी में विश्व चैंपियन जैस्मीन से भी देश को काफी उम्मीदें हैं।
भले ही इस बार खेलों का दायरा सीमित कर दिया गया हो, लेकिन भारतीय एथलीट्स के हालिया फॉर्म को देखते हुए यह तय है कि ग्लास्गो में भारत अपनी खेलकूद की विरासत को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक देगा।
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