
BHU की रिसर्च में बड़ी उपलब्धि; बिना Biopsy के प्रोस्टेट कैंसर की पहचान
Varanasi News: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में हाल ही में प्रोस्टेट कैंसर के निदान के लिए एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। बीएचयू के शोधकर्ताओं ने बिना बायोप्सी के प्रोस्टेट कैंसर का सटीक पता लगाने के लिए एक विधि विकसित की है
कैंसर एक जानलेवा घातक बीमारी है, जिसका पता लगाने के लिए बायोप्सी से लेकर अलग-अलग तरीके की जांच करानी पड़ती है. जिसमें न सिर्फ लंबा समय लगता है, बल्कि मोटी रकम भी लगती है, लेकिन अब आसानी से कैंसर का पता लग सकेगा.
इसको लेकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय की महिला वैज्ञानिक डॉ. गरिमा जैन ने एक बड़ा रिसर्च किया है. उनके अनुसार देश में ऐसा पहला रिसर्च हुआ है, जिसमें खून की जांच से कैंसर का पता चल सकेगा. इसमें उन्होंने पहला रिसर्च प्रोस्टेट कैंसर को लेकर किया है, जिसमें 88 फीसदी परिणाम सकारात्मक मिले हैं.
प्रोस्टेट कैंसर? :
शोधकर्ता महिला वैज्ञानिक डॉ. गरिमा जैन ने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर एक प्रोस्टेट ग्रंथि का कैंसर है, जो पुरुष के यूरिनोजेनिटल ऑर्गन सिस्टम का एक पार्ट है. यह आयु से संबंधित बीमारी है. सामान्य रूप से यह 70 वर्ष की उम्र से ज्यादा के लोगों में देखा जाता है, लेकिन बीते 5 साल से प्रोस्टेट कैंसर के केस में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. इसमें 70 वर्ष से कम 55 से 65 वर्ष की उम्र में भी इस कैंसर को पाया जा रहा है, वर्तमान में कम उम्र में ही प्रोस्टेट कैंसर बढ़ता जा रहा है.
पहली बार BHU में हुआ रिसर्च :
उन्होंने बताया कि, वर्तमान में प्रोस्टेट कैंसर का डायग्नोसिस पाइपलाइन यह रहता है कि पहले मरीज की एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) कराई जाती है. उसके बाद डीआरई टेस्ट उसके बाद बायोप्सी किया जाता है, जिसमें 20 दिन से ज्यादा का समय और लगभग 25000 तक का खर्च आता है, लेकिन कैंसर की स्थिति है या नहीं यह सिर्फ बायोप्सी के बाद ही पता चल पाता है.
उन्होंने कहा कि इसके अलावा और कोई टूल नहीं है जो यह बता सके कि कैंसर है या नहीं. इसकी जटिलता को सरल बनाने के लिए हम लोगों ने नया बायोमार्कर बनाया है, जो लिक्विड बायोप्सी बेस्ड एक टेस्ट है, जिसमें ब्लड सैंपल से आरएनए बायोमार्कर का प्रयोग करके प्रोस्टेट कैंसर है या नहीं है इसको पता कर पा रहे हैं.
2022 में शुरू किया था शोध :
उन्होंने बताया कि यह शोध 2022 में शुरू किया था. हमने मरीजों पर प्री क्लिनिकल ट्रायल को पूरा किया है, जिसमें हमें 88 फीसदी सकारात्मक परिणाम मिले हैं. उन्होंने बताया कि इस टेस्ट से समय बच रहा है, जहां 20 दिन का समय लगता था वहां महज 24 घंटे में ही रिपोर्ट मिल जाती है. इसके साथ ही पैसा बचेगा. 3500 रुपये में ही लोगों को यह पता चल पाएगा कि उन्हें कैंसर है या नहीं. टेस्ट होने के बाद वह बायोप्सी करा कर आगे के इलाज की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. इससे उन्हें जल्दी पता चल जाएगा कि कैंसर किस स्टेज में है.
उन्होंने बताया कि, उनके शोध की खास बात यह है कि ये पहले स्टेज में भी रिजल्ट बता रहा है. इस तरीके के वैश्विक रिसर्च हो रहे हैं. अमेरिका और यूरोप में इस तरीके के टेस्ट और मौजूद भी हैं, लेकिन भारतीय बाजार में इस तरीके का कोई शोध नहीं है ना ही कोई ऐसा टूल तैयार किया है. उसकी वजह है कि अभी हम भारत में पापुलेशन पर काम नहीं कर रहे हैं, यह पहली बार टूल तैयार किया गया है जो मरीज के लिए कारगर है. लगभग 1 से 2 साल में इस रिसर्च को पूरा कर लेंगे और उसके बाद यह आम जनमानस के लिए उपलब्ध हो सकेगा.





