उप्र: ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहती है भाजपा, रेस में हैं यह नेता

फाइल फोटो

लखनऊ। देश के सबसे बड़े सूबे उप्र में दो तिहाई बहुमत के साथ सरकार गठन के बाद भाजपा अब संगठन के कील-कांटे दुरुस्त करने में जुट गई है। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को कैबिनेट में शामिल करने के बाद अब संगठन की कमान किसको दी जाय, इस पर विचार-विमर्श हो रहा है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर किसी ब्राह्मण नेता को कमान सौंपी जा सकती है। इससे ब्राह्मणों की नाराजगी का जो माहौल बना था, उसे समाप्त किया जा सकेगा।

नाम न जाहिर करने की शर्त पर पार्टी के एक वरिष्ठ ने कहा, ‘प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर विचार चल रहा है और इस चर्चा का पूरा फोकस किसी ब्राह्मण नेता को ही कमान देने पर है।’

इस रेस में योगी के पहले कार्यकाल में डिप्टी CM रहे दिनेश शर्मा, प्रदेश महामंत्री गोपाल नारायण शुक्ला और पूर्व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के नाम की भी चर्चा है। उप्र में ब्राह्मण समुदाय की कुल आबादी 10 फीसदी से अधिक है।

ऐसे में उसे साधना किसी भी पार्टी के लिए अहम माना जाता है। इस विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण समुदाय के 89 फीसदी वोट भाजपा को मिले थे। पार्टी इस समर्थन का बदला प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ चुकाना चाहती है। 

ब्राह्मणों की उपेक्षा के आरोप हो जाएंगे खत्म

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की ओर से ब्राह्मण नेताओं का एक पैनल तैयार किया गया था कि बिरादरी के मतदाताओं को कैसे लुभाया जाय। दरअसल, योगी सरकार के पहले कार्यकाल में ब्राह्मण समुदाय की उपेक्षा के आरोप भाजपा पर लगे थे।

ऐसे में पार्टी का मानना है कि ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाने और अब प्रदेश अध्यक्ष का पद समुदाय के ही किसी नेता को देकर ब्राह्मणों को लुभाया जा सकता है।

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