काले धन का कुबेर पीयूष जैन: तहखानों में दबा कर रखी गई थी काली कमाई

piyush jain kanpur

कन्नौज (उप्र)। पिछले चार दिनों से उप्र के कन्नौज जनपद में इत्र कारोबारी पीयूष जैन के मकान और कारोबारी ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चला रही जीएसटी की विजिलेंस टीम की कड़ी मशक्कत के बाद दबे हुए राज बाहर आने लगे हैं।

पीयूष जैन के घर, कारखाना और गोदाम में जगह-जगह बेसमेंट, सीक्रेट सीक्रेट चैंबर बने थे। उसे वह तहखाने के तौर पर इस्तेमाल करता था। उन्ही तहखानों में दबा कर रखी गई काली कमाई अब सामने आ रही है।

गुजरात के अहमदाबाद की डीजीजीआई विंग की विजिलेंस टीम की 72 घंटे से ज्यादा की मेहनत के बाद अब यह बात सामने आ रही है कि पीयूष जैन ने अपनी काली कमाई को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए काफी फूलप्रूफ इंतजाम कर रखा था।

उसने अपने घर में बने बेसमेंट को चंदन का तेल रखने का अड्डा बना लिया था। सीढ़ियों के नीचे सीक्रेट चैंबर बने थे। उसमें भी चंदन का तेल रखा जाता था। अपने बेडरूम में बेड के नीचे फर्श को खुदवाकर उसमें लॉकर रखवाया था।

अलग-अलग कमरों में अलमारियां और लॉकर भी बहुत कायदे से रखी गई थीं, कि उस पर कोई ज्यादा ध्यान नहीं दे। सर्च ऑपरेशन के दौरान विजिलेंस टीम ने जब सभी चीजों की पड़ताल शुरू की तो उनमें ही दबाकर रखी गई काली कमाई बाहर निकलने लगी।

कमरे के बेसमेंट में मिला नोटों का जखीरा

पीयूष जैन के मकान में कई कमरे ऐसे बने हैं, जिनमें सीक्रेट चैंबर है। उसके ठीक नीचे ही बेसमेंट भी है। उनमें कई छोटे-छोटे ब्लॉक हैं। उनपर कायदे से टाइल्स फिट की गई है।

उन्ही ब्लॉकों के अंदर नोटों से भरी बोरियों को छिपाकर रखा गया था। बताया जा रहा है कि इस तरह से नोटों से भरी 10 बोरियां मिली हैं। जबकि बाकी की रकम लॉकर और अलमारियों से मिली हैं।

मकान के ही चैंबर में मिला चंदन तेल

हालांकि पीयूष जैन का एक बड़ा गोदाम भी है। मकान से करीब 250 मीटर दूरी पर स्थित उस गोदाम में भी इत्र और उससे तैयार होने वाले कंपाउंड (चंदन का तेल) रखे जाते हैं। बताया जा रहा है कि वहां भी बेसमेंट बनाकर उसे तहखाना के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

चंदन का तेल काफी कीमती होता है। बाजार में उसकी कीमत एक लाख रुपए किलो से शुरू होती है। ऐसे में उसने चंदन के तेल को अलग-अलग ड्रम में भरकर अपने मकान के ही एक चैंबर में रखा था। पड़ताल के दौरान चैंबर के ऊपर रखा सीमेंटेड ढक्कन को हटाने पर वहां ड्रम रखा मिला।

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