माफी के बाद आकाश आनंद की वापसी, मायावती ने फिर बनाया BSP का राष्ट्रीय संयोजक

Akash Anand BSP: मायावती ने फिर आकाश आनंद पर जताया भरोसा, राष्ट्रीय संयोजक पद पर की वापसी

Lucknow : बहुजन समाज पार्टी (BSP) में आकाश आनंद की एक बार फिर वापसी हो गई है। पार्टी प्रमुख मायावती ने सोमवार को अपने भतीजे आकाश आनंद को फिर से राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त कर दिया। यह फैसला उन्हें पार्टी से पूरी तरह अलग किए जाने के करीब 25 दिन बाद आया है। 

आकाश आनंद ने हाल ही में मायावती से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी थी और उनके नेतृत्व में पार्टी के लिए काम करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था कि वह BSP और उसके मिशन के लिए काम करना चाहते हैं तथा किसी दूसरी पार्टी में जाने का उनका इरादा नहीं है।

3 सितंबर को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया था

मायावती ने 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को BSP के राष्ट्रीय संयोजक पद की सभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया था। उस समय मायावती ने कहा था कि आकाश को अभी और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है। यह 2024 के बाद तीसरी बार था जब उन्हें पार्टी की अहम जिम्मेदारी से हटाया गया।

इसके बाद 10 सितंबर को मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से भी पूरी तरह मुक्त करने का ऐलान किया था। यह घटनाक्रम आकाश के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के ऐलान के बाद हुआ था।

अब फिर राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी

करीब 25 दिन बाद मायावती ने अपना फैसला बदलते हुए आकाश आनंद को दोबारा BSP का राष्ट्रीय संयोजक बना दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, आकाश की सार्वजनिक माफी और मायावती के नेतृत्व में काम करने की प्रतिबद्धता के बाद उनकी पार्टी में वापसी का रास्ता साफ हुआ।

मायावती ने आकाश के दोबारा नियुक्त होने पर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की है। इस फैसले के साथ BSP के संगठन में आकाश की भूमिका फिर महत्वपूर्ण हो गई है।

आकाश आनंद का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा

आकाश आनंद को मायावती ने पहले भी पार्टी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं। उन्हें राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया और दिसंबर 2023 में मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी घोषित किया था। इसके बाद 2024 से उनकी पार्टी की जिम्मेदारियों में कई बार बदलाव हुए।

अब एक बार फिर राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के बाद आकाश आनंद की भूमिका BSP के संगठन और आगामी राजनीतिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण रहने वाली है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मायावती का यह फैसला पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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