
Lucknow STF की बड़ी कार्रवाई… 1 करोड़ की नकली ऑक्सीटोसिन फैक्ट्री का भंडाफोड़
Lucknow News: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने रविवार को राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित उजरियाव गांव (विजय खंड-1) में छापेमारी कर जहरीले नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया। इस दौरान एसटीएफ ने गिरोह के सरगना समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि मकान मालिक फरार बताया गया है। बरामद नकली इंजेक्शन और रासायनिक सामग्री की कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये आंकी गई है।
महीनों से चल रही थी जहरीले इंजेक्शन की फैक्ट्री
एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक सिंह ने बताया कि गिरोह पिछले कई महीनों से इस मकान में चीन से मंगवाए गए पाउडर की मदद से नकली ऑक्सीटोसिन तैयार कर रहा था। इस पाउडर में फिनायल, यूरिया, नमक, सिरका (विनेगर) और रंग मिलाकर जहरीले इंजेक्शन बनाए जाते थे। तैयार इंजेक्शन को लखनऊ, बिहार, दिल्ली, और अन्य राज्यों में सप्लाई किया जा रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार आरोपी बागपत जिले के बड़ौत क्षेत्र के मलकपुर गांव निवासी कयूम अली (बसंतकुंज PM आवास में रहता था) और मदेयगंज कदम रसूल वार्ड निवासी मोहम्मद इब्राहिम हैं। वहीं, मकान मालिक गौसुल हसन फरार है और उसकी तलाश जारी है।
चीन से मंगवाया जाता था पाउडर
कयूम अली चीन से कुरियर के जरिए इंजेक्शन बनाने का पाउडर मंगवाता था। पार्सल पहले गाजियाबाद के लोनी कटरा पहुंचता, जहां से गिरोह के सदस्य उसे लखनऊ लाते थे। तैयार इंजेक्शन को डेयरी मालिकों, सब्जी विक्रेताओं और किसानों तक एजेंटों के माध्यम से पहुंचाया जाता था।
खतरनाक असर — दूध और सब्जियों में जहर
एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि ये इंजेक्शन गाय-भैंस को अधिक दूध निकालने, सब्जियों की चमक बढ़ाने, और फसलों की तेजी से वृद्धि के लिए इस्तेमाल किए जाते थे। इससे निकलने वाला दूध और सब्जियां अत्यंत जहरीली होती हैं। इन्हें खाने से लोगों में
- कैंसर,
- हार्मोन असंतुलन,
- प्रजनन क्षमता में कमी,
- और गर्भवती महिलाओं व बच्चों में गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
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मौके से बरामद सामान
छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने भारी मात्रा में नकली इंजेक्शन और रसायन जब्त किए, जिनमें शामिल हैं:
- 1018 तैयार ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन शीशियां (180 एमएल)
- 70 लीटर ऑक्सीटोसिन (5 लीटर के 14 गैलन)
- 55 लीटर फिनायल
- 27 लीटर विनेगर
- 16,500 खाली शीशियां
- 9 कैप सीलिंग मशीनें
- 3,000 नीले और 3,000 लाल एल्यूमिनियम कैप
- 2,500 रबर कैप
- 19 किलोग्राम नमक
- 1 फोन पे स्कैनर, 3 मोबाइल फोन, और 790 रुपये नकद
सभी बरामद नमूनों को लैब में जांच के लिए भेजा गया है।
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लाखों में कमाई, नेटवर्क कई राज्यों में फैला
पूछताछ में कयूम ने कबूल किया कि वह लंबे समय से इस अवैध धंधे में लगा है और हर महीने लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहा था। एसटीएफ अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, सप्लायर्स और खरीदारों की तलाश कर रही है। एसटीएफ अधिकारी दीपक सिंह ने कहा कि यह कार्रवाई केवल नकली दवा निर्माण के खिलाफ नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बड़ा कदम है। ऐसे जहरीले इंजेक्शन समाज के लिए गंभीर खतरा हैं।
इस पूरे मामले ने फिर एक बार सवाल खड़ा कर दिया है कि शहरों के बीचोबीच अवैध फैक्ट्रियां किस तरह से सक्रिय हैं और नकली दवा माफिया किस हद तक लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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