
UP में वोटर लिस्ट की बड़ी सफाई… SIR में 99% काम पूरा, खतरे में BJP का वोट बैंक
UP SIR: उत्तर प्रदेश में पहली बार बड़े पैमाने पर लागू की गई Systematic Information Revision (SIR) प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। राज्य भर में 99.24% डेटा डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया गया है, लेकिन इससे जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों हलकों में हलचल मचा दी है।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कुल मतदाताओं की गणना के दौरान 1 करोड़ 27 लाख से अधिक लोग अपने पते पर नहीं मिले। ये लोग अस्थाई रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं—या तो नौकरी, शिक्षा, किराये के स्थान परिवर्तित करने, या अन्य व्यक्तिगत कारणों से।
46 लाख मृत, 24 लाख डुप्लीकेट—वोटर लिस्ट में बड़ी सफाई
SIR प्रक्रिया के दौरान जो बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं, उनमें निम्न शामिल हैंः
- 46 लाख लोग मृत पाए गए
- 23.69 लाख डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन पाए गए
- 84 लाख से अधिक मतदाता सत्यापन के दौरान अनुपस्थित मिले
मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि अब तक 76% से अधिक गणना प्रपत्रों का मैपिंग किया जा चुका है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में वोटरों का सत्यापन बाकी है। इसी कारण आयोग ने केंद्र से दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है, क्योंकि करीब 2 करोड़ 91 लाख SIR फॉर्म Detectable Category (असंगृहित श्रेणी) में हैं—इनके सत्यापन के लिए टीमों को अभी और समय चाहिए।
खतरे में BJP का मजबूत वोट बैंक?
SIR प्रक्रिया का सबसे बड़ा प्रभाव शहरी मतदाता वर्ग पर देखा जा रहा है।
डुप्लीकेट हटाने और पता सत्यापन की सख्त प्रक्रिया के कारण अब एक मतदाता सिर्फ एक ही स्थान की वोटर लिस्ट में रह सकता है।
दरअसल, बड़ी संख्या में शहरों के निवासियों ने अपने पैतृक गांव की वोटर लिस्ट में बने रहना चुना है—इसके पीछे कारण हैंः
- ग्रामीण क्षेत्र में जमीन-जायदाद जुड़े मामले
- पंचायत चुनावों में रुचि
- गांव में पहचान मजबूत होना
- शहरों में लगातार बदलता किराए का पता
इस कारण लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ और आगरा जैसे शहरों में शहरी वोटर लिस्ट से बड़ी कटौती की जा रही है। यह स्थिति BJP के अंदर चिंताएं बढ़ाने वाली है क्योंकि पार्टी का शहरी आधार पारंपरिक रूप से मजबूत माना जाता है।
कौन से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित?
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार कई प्रमुख जिलों में बड़ी संख्या में एंट्रियां हटाने की प्रक्रिया चल रही हैः
- अयोध्या: लगभग 4,100 वोट हटाने की तैयारी
- लखनऊ: करीब 2.2 लाख वोटर सूची से बाहर
- प्रयागराज: सबसे अधिक 2.4 लाख हटाए जा रहे
* इलाहाबाद नॉर्थ
* इलाहाबाद साउथ
* इलाहाबाद कैंटोनमेंट
इन तीनों क्षेत्रों में हटाए जाने की संख्या सबसे ज्यादा है
- गाजियाबाद: करीब 1.6 लाख वोटर हटाए जा रहे
- सहारनपुर: लगभग 1.4 लाख वोट प्रभावित
इन आंकड़ों से साफ है कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में शहरी क्षेत्रों का चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है।
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आयोग का अगला कदम क्या?
चुनाव आयोग अब उन 2.91 करोड़ Detectable SIR फॉर्मों की जांच को प्राथमिकता दे रहा है, जिनमें पता, दस्तावेज या पहचान संबंधी विसंगतियां मिली हैं।
- टीमें घर-घर जाकर सत्यापन कर रही हैं
- मोबाइल व ईमेल के जरिए मतदाताओं से संपर्क साधा जा रहा
- शहरी क्षेत्रों में विशेष कैंप लगाए जाएंगे
आयोग का उद्देश्य है कि जनवरी तक अंतिम शुद्ध मतदाता सूची प्रकाशित की जा सके।
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किसे नुकसान, किसको हो सकता है फायदा?
- बीजेपी: शहरी क्षेत्रों में वोटर कटौती से पार्टी को सीधे नुकसान की आशंका
- गांवों में एंट्री बचाए रखने वाले मतदाता: ग्रामीण पार्टियों के लिए अवसर बढ़ सकते हैं
- नए मतदाता: पहली बार वोट डालने वालों का प्रभाव अब और निर्णायक होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह UP के चुनावी परिदृश्य का सबसे बड़ा डेटा रीसेट है, जिसका सीधा असर 2026 विधानसभा और 2029 लोकसभा चुनावों पर देखने को मिलेगा।
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