
योगी सरकार का बड़ा फैसला… सभी शिक्षण संस्थानों में रोज गूंजेगा ‘वंदे मातरम’
Gorakhpur News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर प्रदेशभर के 403 विधानसभा क्षेत्रों से एकता यात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि अब उत्तर प्रदेश के सभी विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य किया जाएगा।
उनका कहना था कि इससे प्रदेश के हर नागरिक के मन में भारत माता और मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना जागृत होगी।
सीएम योगी ने कहा कि वंदे मातरम वह गीत है जिसने आजादी के आंदोलन में भारत की चेतना को जगाया। लेकिन कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के चलते इस गीत में संशोधन किया। उन्होंने कहा कि आज भी कुछ लोग वंदे मातरम का विरोध करते हैं, जबकि कोई भी व्यक्ति, मत या मजहब राष्ट्र से बड़ा नहीं हो सकता।
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योगी आदित्यनाथ ने सपा सांसद द्वारा वंदे मातरम गाने से इनकार का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही लोग हैं जो जिन्ना को सम्मान देने वाले कार्यक्रमों में शामिल होते हैं, लेकिन लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती में नहीं आते। उन्होंने कहा, “अगर कांग्रेस ने 1923 में मोहम्मद अली जौहर के विरोध का समर्थन करने के बजाय वंदे मातरम के सम्मान में खड़े होने का साहस दिखाया होता, तो शायद भारत का विभाजन नहीं हुआ होता।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि कांग्रेस ने 1937 में इस गीत में संशोधन के लिए कमेटी बनाई थी, जिसने इसे धार्मिक प्रतीकों से जोड़ने की बात कही थी। योगी ने कहा कि वंदे मातरम धरती माता की उपासना का गीत है और भारत के ऋषियों ने हमेशा धरती को माता के रूप में पूजने की परंपरा को बढ़ावा दिया है।
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उन्होंने कहा, “जो लोग भारत में रहते हैं, वे सभी भारत के प्रति निष्ठावान होकर इसकी एकता और अखंडता के लिए काम करें। वंदे मातरम के विरोध का कोई औचित्य नहीं है।”
योगी ने तुष्टिकरण की राजनीति को 1947 के विभाजन का कारण बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब राष्ट्र से ऊपर कोई भी मत या मजहब न हो। उन्होंने कहा, “भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रवाद सर्वोपरि है, यही सरदार पटेल के विचारों की सच्ची श्रद्धांजलि है।”
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