महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का 93वां संस्थापक सप्ताह 4 दिसंबर से, CM Yogi करेंगे शुभारंभ

Gorakhpur News: गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का 93वां संस्थापक सप्ताह समारोह 4 दिसंबर से प्रारंभ होगा। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता परिषद के संरक्षक और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी मौजूद रहेंगे।

भव्य शोभायात्रा में चार हजार विद्यार्थी शामिल
सप्ताहभर चलने वाले इस कार्यक्रम में विभिन्न अकादमिक एवं क्रीड़ा प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। परंपरा के अनुसार, उद्घाटन सत्र के बाद महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के मैदान से एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
इस शोभायात्रा में परिषद से जुड़े संस्थानों के करीब चार हजार विद्यार्थी हिस्सा लेंगे।
मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी शोभायात्रा की सलामी लेंगे।

शोभायात्रा में अनुशासन, श्रेष्ठ पथ संचलन, जन-जागरूकता झांकियां और नारे मुख्य आकर्षण होंगे।
परिषद के संयुक्त मंत्री एवं गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने बताया कि उद्घाटन कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए 1,000 से अधिक शिक्षक, कर्मचारी और स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं।

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10 दिसंबर को होगा समापन समारोह
समापन समारोह 10 दिसंबर को आयोजित होगा, जिसकी अध्यक्षता फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।
इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह मुख्य अतिथि रहेंगे।

समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा शिक्षा परिषद की संस्थाओं के अंतर्गत—

  • श्रेष्ठतम संस्था
  • श्रेष्ठतम परिचारक
  • श्रेष्ठतम कर्मचारी
  • श्रेष्ठतम शिक्षक
  • स्नातकोत्तर, स्नातक, हाईस्कूल और इंटर के श्रेष्ठतम विद्यार्थी

को स्मारक स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे।

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महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ को समर्पित समारोह
यह संस्थापक सप्ताह महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और उनके उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ की स्मृति में मनाया जाता है।
महंत दिग्विजयनाथ ने राष्ट्रीयता और मूल्यपरक शिक्षा के उद्देश्य से परिषद की स्थापना की थी, जिसे बाद में महंत अवेद्यनाथ ने विस्तारित किया।

वर्तमान में गोरक्षपीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संरक्षण में परिषद की 50 से अधिक संस्थाएं शिक्षा, चिकित्सा और सेवा के क्षेत्र में योगदान दे रही हैं।

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