डॉ. रविकांत की पदोन्नति पर उठे सवाल, कुलसचिव के खिलाफ जांच की मांग

शपथपत्र में लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी चयन समिति और कार्य परिषद से साझा न करने का आरोप, कुलपति से पदोन्नति निरस्त करने की मांग

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के डॉ. रविकांत की पदोन्नति को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता कार्तिक पाण्डेय ने कुलपति को दिए एक शपथपत्र में डॉ. रविकांत की पदोन्नति तत्काल निरस्त करने और विश्वविद्यालय के कुलसचिव के खिलाफ जांच कराए जाने की मांग की है।

शपथपत्र के अनुसार, कुलसचिव की ओर से डॉ. रविकांत को 8 जून 2026 को पदोन्नति पत्र संख्या R-10677 जारी किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि डॉ. रविकांत के खिलाफ आपराधिक मुकदमे लंबित होने के बावजूद उन्हें पदोन्नति प्रदान की गई।

शपथपत्र में दावा किया गया है कि डॉ. रविकांत के खिलाफ हसनगंज थाने में एफआईआर संख्या 110/2022 दर्ज है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए, 504 और 505(2) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि इस मामले में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया जा चुका है।

शपथपत्र में एक अन्य न्यायिक मामले का भी उल्लेख किया गया है। इसके मुताबिक, डॉ. रविकांत से संबंधित एक याचिका उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के समक्ष धारा 482 के तहत याचिका संख्या 1510/2025 के रूप में दाखिल है। इसमें 18 फरवरी 2025 को नोटिस जारी होने और मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन होने का दावा किया गया है।

कार्तिक पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि इन मामलों की जानकारी के बावजूद डॉ. रविकांत की पदोन्नति की गई। शपथपत्र में कहा गया है कि चयन समिति को डॉ. रविकांत के खिलाफ चल रहे मुकदमों की जानकारी नहीं दी गई। साथ ही कार्य परिषद के सदस्यों को भी इस संबंध में जानकारी उपलब्ध न कराए जाने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता ने कुलसचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। शपथपत्र में आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 16(4) के तहत निर्धारित वैधानिक जिम्मेदारियों का उचित तरीके से निर्वहन नहीं किया गया। साथ ही आरोप लगाया गया है कि डॉ. रविकांत को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रक्रिया में अनियमितताएं की गईं।

कार्तिक पाण्डेय ने कुलपति से मांग की है कि कुलसचिव को तत्काल उनके पद से कार्यमुक्त करते हुए पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की जाए। साथ ही 8 जून 2026 को जारी डॉ. रविकांत के पदोन्नति पत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की भी मांग की गई है।

शपथपत्र को 31 अगस्त 2026 को सत्यापित कराया गया है। मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

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