
भारत में पानी और बिजली का संकट, सूखा पड़ने से बांध खाली
Delhi Monsoon: वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक विदाई हो चुकी है, लेकिन चार महीनों के बारिश के आंकड़े देश के सामने एक गंभीर जल और ऊर्जा संकट की आहट दे रहे हैं। कागजों पर भले ही पूरे सीजन में सामान्य औसत से महज 13% कम बारिश दर्ज हुई हो, लेकिन मानसूनी बारिश के असमान वितरण के चलते देश का लगभग 51% भूभाग सूखे जैसी विषम परिस्थितियों का सामना कर रहा है। देश के कुछ हिस्सों में जहां बीते 20 वर्षों की सबसे भीषण बारिश देखने को मिली, वहीं कई राज्य 17 वर्षों के सबसे गंभीर सूखे से जूझ रहे हैं।
पानी और पनबिजली पर पड़ेगा सीधा असर
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश के प्रमुख 178 जलाशयों का जलस्तर गंभीर स्थिति में है। देश के 178 प्रमुख बांधों में अब तक कुल क्षमता का मात्र 70.67% पानी ही भर सका है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21% कम तथा सामान्य औसत से 11.5% कम है। 21 बांध आधे भी खाली: देश के 21 बड़े बांध अपनी कुल क्षमता के 50% से भी कम भरे हैं। इनमें 5 बांध तेलंगाना, 4 गुजरात और 3 महाराष्ट्र के हैं।
क्षेत्रवार कमी: दक्षिण भारत के बांधों में सामान्य से 33.2% कम पानी है, जबकि उत्तर भारत के बांधों में यह कमी सामान्य से 21.72% दर्ज की गई है।
अमूमन इस समय तक 81% भर जाने वाले मराठवाड़ा के बांधों में इस बार केवल 46% पानी ही बचा है। हालात से निपटने के लिए प्रशासन ने अभी से 500 कुओं का अधिग्रहण कर 246 टैंकर तैनात किए हैं।
पनबिजली उत्पादन गिरा, कोयले पर बढ़ी निर्भरता
देश के ये प्रमुख जलाशय न केवल पीने और सिंचाई का पानी देते हैं, बल्कि देश की कुल बिजली का 11% हिस्सा भी हाइड्रोपावर (पनबिजली) से उत्पन्न होता है:
बिजली बनाने वाले प्रमुख 20 बांधों में से 5 में सामान्य से काफी कम जलस्तर है।
कम बारिश के चलते जून 2026 में पिछले वर्ष के मुकाबले बिजली उत्पादन में 21% और अगस्त में 12% की भारी गिरावट दर्ज की गई।
पनबिजली की इस कमी की भरपाई के लिए मानसून के दौरान भी थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले से अतिरिक्त बिजली बनानी पड़ी।
फरवरी 2027 तक रहेगा अल-नीनो, सर्दी कम और गर्मी जल्दी पड़ेगी
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मौसम का यह असामान्य मिजाज अल-नीनो के प्रभाव के चलते बना हुआ है। अल-नीनो की सक्रियता फरवरी 2027 तक बनी रहने का अनुमान है, जिसका चरम (पीक) नवंबर-दिसंबर में देखने को मिल सकता है।





