Drishyam 3 Review: ‘दृश्यों’ के खेल में अजय देवगन का तगड़ा दांव, जयदीप अहलावत ने डाला सस्पेंस में तड़का

Drishyam 3 Movie Review: ‘शब्दों में झूठ छुपने की जगह ढूंढ लेते हैं, लेकिन दृश्य कभी झूठ नहीं बोलते।’ साल 2015 में विजय सलगांवकर (अजय देवगन) ने 2 अक्टूबर की जो कहानी गढ़ी थी, आज भी दर्शक उसके मुरीद हैं। अब उसी चक्रव्यूह का आखिरी अध्याय ‘दृश्यम 3: द कन्क्लूजन’ (Drishyam 3: The Conclusion) के रूप में सिनेमाघरों में दस्तक दे चुका है।

अभिषेक पाठक द्वारा निर्देशित यह फिल्म इस बार आपको एक नए सवाल के साथ बांधे रखती है। आइए जानते हैं इस सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म का पूरा रिव्यू।

‘Drishyam 3’ की कहानी

इस बार कहानी मलयालम वर्जन से अलग है और इसे नए सिरे से बुना गया है। विजय सलगांवकर और उसका परिवार एक बार फिर पुलिस, केस और कोर्ट के चक्कर में फंस गया है। इस बार पुलिस के हाथ विजय के खिलाफ कुछ नए और पुख्ता सबूत लगे हैं।

आईजी मीरा देशमुख (तब्बू) को इस बार ‘इंसाफ नहीं, बदला चाहिए’। पुलिस की तरफ से नया दांव खेलने के लिए क्राइम ब्रांच के सख्त एसपी राजवीर सिंह तोमर (जयदीप अहलावत) की एंट्री होती है। वहीं, कोर्ट में केस कभी न हारने वाले वकील इंद्रजीत शेट्टी (प्रकाश राज) विजय को घेरते नजर आते हैं।

अब तक हर किसी के जेहन में एक ही सवाल था- “2 अक्टूबर को क्या हुआ था?” लेकिन इस बार कहानी का फोकस एक नए सस्पेंस पर शिफ्ट हो जाता है- “23 जुलाई को क्या हुआ था?“ इसी रहस्य से पर्दा उठाने के लिए आपको सिनेमाघरों का रुख करना होगा।

फर्स्ट हाफ बनाम सेकंड हाफ

फिल्म शुरुआत में केस को बिल्ड करने में थोड़ा वक्त लेती है, जिससे कभी-कभी पटकथा धीमी महसूस होती है। हालांकि, बीच-बीच में इंस्पेक्टर गायतोंडे (कमलेश सावंत) की शानदार कॉमिक टाइमिंग और सीटी-मार डायलॉग्स दर्शकों को बोर नहीं होने देते।

फिल्म का असली रोमांच इंटरवल के बाद शुरू होता है। जब कोर्टरूम ड्रामा अपने चरम पर पहुंचता है, तब फिल्म आपको सीट से बांधे रखती है। अभिषेक पाठक का निर्देशन सस्पेंस को बरकरार रखने में पूरी तरह सफल रहा है। क्लाइमैक्स के 30 मिनट बेहद दिलचस्प हैं, जो इस फ्रेंचाइजी को एक शानदार विदाई देते हैं।

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स्टारकास्ट की दमदार परफॉर्मेंस (Acting Performances)

अपनी बोलती आंखों और इंटेंस लुक के साथ अजय देवगन ने विजय सलगांवकर के किरदार को अमर कर दिया है। वह एक शांत, लेकिन दिमाग से हमेशा एक कदम आगे रहने वाले व्यक्ति के रोल में फिर से छा गए हैं। एसपी राजवीर के रूप में जयदीप की एंट्री फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी है। उनकी और अजय देवगन की साइकोलॉजिकल टक्कर (दिमागी लड़ाई) पर्दे पर आग लगा देती है।

वकील के रूप में प्रकाश राज ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। कोर्टरूम के दृश्यों में उनकी डायलॉग डिलीवरी शानदार है।तब्बू और रजत कपूर का काम ठीक-ठाक है। वहीं, विजय की पत्नी नंदिनी के रोल में श्रिया सरन के हिस्से एक बेहद पावरफुल सीन आया है, जिसे उन्होंने बेहतरीन तरीके से निभाया है।

फिल्म देखें या नहीं?

यदि आप ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी के जबरा फैन हैं, तो आपको यह फिल्म बिल्कुल मिस नहीं करनी चाहिए। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी (सुधीर चौधरी) और बैकग्राउंड स्कोर (अमर मोहिले) सस्पेंस के माहौल को और गहरा बनाते हैं। अजय देवगन और जयदीप अहलावत के बीच की जबरदस्त टक्कर और एक बेहतरीन कोर्टरूम ड्रामा देखने के लिए ‘दृश्यम 3: द कन्क्लूजन‘ को एक बार जरूर देखा जाना चाहिए।

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