नई रिटेनिंग वॉल भी नहीं टिक सकी! 6 महीने में दूसरी बार हादसा, ठेकेदार फिर करेगा निर्माण

Ujjain Garoth Four Lane Project: फरवरी में एप्रोच धंसने के बाद जून में बनाई गई नई दीवार अगस्त में फिर खिसकी, ठेकेदार अब 10 करोड़ खर्च कर 500 मीटर हिस्सा दोबारा बनाएगा

Ujjain: उज्जैन-गरोठ फोरलेन परियोजना के तहत प्रेमनगर में बने रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) की रिटेनिंग वॉल छह महीने में दूसरी बार खिसककर टूटने का मामला सामने आया है। एक ही हिस्से में दोबारा तकनीकी समस्या आने के बाद अब निर्माण की गुणवत्ता और मरम्मत कार्यों पर सवाल उठने लगे हैं।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि फरवरी में हुई पहली घटना के बाद प्रभावित हिस्से को दोबारा तैयार किया गया था, लेकिन नई रिटेनिंग वॉल बनने के कुछ ही समय बाद उसी स्थान पर फिर डिस्प्लेसमेंट क्यों हुआ।

फरवरी में धंसी थी एप्रोच, क्षतिग्रस्त हुई थी रिटेनिंग वॉल
घटनाक्रम के अनुसार, 13 फरवरी को आरओबी की एप्रोच धंसने के साथ रिटेनिंग वॉल क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद मामले में कार्रवाई की गई और ठेकेदार का भुगतान रोक दिया गया। प्रभावित हिस्से को दोबारा बनाने के निर्देश दिए गए थे।

इसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया गया और जून में नई रिटेनिंग वॉल तैयार कर ली गई।

अगस्त में फिर खिसकी दीवार, मटेरियल भी ढहने लगा
जून में दोबारा तैयार की गई दीवार में अगस्त के दौरान फिर डिस्प्लेसमेंट की समस्या सामने आई। इसके बाद ब्लॉक से बनी दीवार और उसमें भरा मटेरियल खिसकने और ढहने लगा।

एक ही स्थान पर लगातार दूसरी बार रिटेनिंग वॉल में समस्या आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं।

यह भी पढ़ें…

राजगढ़ में बड़ा स्लीपर बस हादसा, चार यात्रियों की मौत

NHAI के निर्देश पर फिर बनेगा करीब 500 मीटर हिस्सा
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब ठेकेदार अपने खर्च पर प्रभावित हिस्से को दोबारा तैयार करेगा।

जानकारी के अनुसार, ठेकेदार को करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 500 मीटर हिस्से को फिर तोड़कर नए सिरे से बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

यह भी पढ़ें…

बॉयफ्रेंड की CAR पर हुई फ़िदा, लिपस्टिक से हजारों बार किया चुंबन

दूसरी बार हुई चूक ने बढ़ाई चिंता
छह महीने में दूसरी बार एक ही स्थान पर रिटेनिंग वॉल के खिसकने और टूटने की घटना ने परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फरवरी की घटना के बाद मरम्मत और पुनर्निर्माण के बावजूद अगस्त में फिर समस्या सामने आने से अब यह जांच का विषय बन गया है कि आखिर पहली घटना के बाद की गई तकनीकी सुधार प्रक्रिया में कहां कमी रह गई।

उज्जैन-गरोठ फोरलेन परियोजना से जुड़े इस आरओबी का मामला अब इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि प्रभावित हिस्से को दूसरी बार तोड़कर तैयार करने में ठेकेदार को करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।

यह भी पढ़ें…

Ujjain में महाकाल की चौथी सवारी आज, उमा-महेश स्वरूप देगा प्रकृति संरक्षण का संदेश

Back to top button