डिजिटल अरेस्ट से नौकरी के झांसे तक… लखनऊ में दो लोगों से 36 लाख की साइबर ठगी

लखनऊ में साइबर ठगी के दो मामलों में 36.04 लाख रुपये की ठगी, 82 वर्षीय बुजुर्ग को 22 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 13.59 लाख ऐंठे, नौकरी का झांसा देकर महिला से 22.45 लाख वसूले।

Lucknow: लखनऊ में साइबर ठगी के दो मामलों ने लोगों को हैरान कर दिया है। 82 वर्षीय रिटायर्ड सिविल डिफेंसकर्मी को एटीएस, एनआईए और ईओडब्ल्यू अधिकारी बनकर जालसाजों ने करीब 22 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और 13.59 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। वहीं, पीजीआई इलाके की 56 वर्षीय महिला से होमगार्ड विभाग में क्लर्क की नौकरी लगवाने का झांसा देकर 22.45 लाख रुपये ठग लिए गए। दोनों मामलों में पीड़ितों ने साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की है।

ATS अधिकारी बनकर किया फोन
गोमतीनगर के विजयखंड निवासी विजय प्रकाश गुप्ता सिविल डिफेंस से रिटायर्ड हैं। उनके मुताबिक, 3 सितंबर की सुबह करीब 10:19 बजे उनके मोबाइल पर एक कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को गोमतीनगर एक्सटेंशन स्थित एटीएस का अधिकारी बताया और कहा कि उन्हें पूछताछ के लिए एटीएस कार्यालय आना होगा।

बुजुर्ग ने अपनी उम्र और असमर्थता का हवाला देते हुए गोमतीनगर थाने आने की बात कही। इस पर कॉल करने वाले ने उन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारी से बात कराने की बात कही। इसके बाद कथित अधिकारी ने बातचीत के दौरान उन्हें एक गंभीर वित्तीय अपराध में फंसने का डर दिखाया।

2.56 करोड़ के अवैध लेनदेन का डर दिखाया
जालसाजों ने विजय प्रकाश को बताया कि उनके नाम से जुड़े एक एटीएम कार्ड के जरिए करीब 2.56 करोड़ रुपये का अवैध लेनदेन हुआ है। इसके बाद उन्हें जांच और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया गया।

जालसाजों ने बुजुर्ग को परिवार की सुरक्षा को लेकर भी डराया और उन्हें कमरे में अकेले रहने के लिए कहा। इसके बाद करीब 22 दिनों तक वॉट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए उनकी निगरानी की गई।

दो बार में 13.59 लाख रुपये कराए ट्रांसफर
डिजिटल अरेस्ट के दौरान जालसाजों ने बुजुर्ग को कथित जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। आरोप है कि उनसे दो बार में कुल 13.59 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।

बाद में उन्हें ठगी का एहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की।

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क्लर्क की नौकरी का झांसा देकर महिला से 22.45 लाख की ठगी
साइबर ठगी का दूसरा मामला पीजीआई थाना क्षेत्र की वृंदावन योजना का है। यहां रहने वाली 56 वर्षीय महिला को जालसाजों ने होमगार्ड विभाग में क्लर्क की नौकरी लगवाने का झांसा दिया।

आरोपियों ने नौकरी दिलाने के नाम पर महिला से अलग-अलग समय पर रकम की मांग की। नौकरी मिलने की उम्मीद में महिला ने जालसाजों को कुल 22.45 लाख रुपये दे दिए।

रकम लेने के बाद जब नौकरी नहीं मिली और आरोपियों से संपर्क नहीं हो सका, तब महिला को ठगी का पता चला। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस से की गई।

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दो मामलों में 36 लाख से ज्यादा की ठगी
लखनऊ में सामने आए इन दोनों मामलों में पीड़ितों से कुल 36.04 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई है। एक मामले में जालसाजों ने सरकारी जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर बुजुर्ग को डराया, जबकि दूसरे मामले में सरकारी नौकरी का लालच देकर महिला को निशाना बनाया।

पुलिस अब दोनों मामलों में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और पैसों के लेनदेन की जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस लगातार लोगों से अपील करती रही है कि किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंकिंग जानकारी या पैसे साझा न करें।

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