
जेल में कैसे पहुंचा स्मार्टफोन? प्रज्वल रेवन्ना केस पर किरण बेदी ने खोली सुरक्षा की पोल
Delhi: पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना के जेल बैरक से कथित तौर पर एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद होने के मामले ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेंगलुरु स्थित परप्पना अग्रहारा केंद्रीय कारागार में केंद्रीय अपराध शाखा की छापेमारी के दौरान फोन मिलने की खबर के बाद पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है।
किरण बेदी ने जेल के भीतर मोबाइल फोन पहुंचने की घटना को सुरक्षा जांच में गंभीर चूक बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जेल में प्रवेश करने वाले कैदियों की सही तरीके से तलाशी ली जाती है, तो उनके पास स्मार्टफोन कैसे पहुंच सकता है।
तलाशी में लापरवाही को बताया मुख्य वजह
किरण बेदी ने कहा कि जेल में किसी कैदी के पास मोबाइल फोन मिलना सीधे तौर पर तलाशी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। उनके मुताबिक, जेल में प्रवेश के दौरान कैदियों की अनिवार्य तलाशी होती है और इस प्रक्रिया में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने संकेत दिया कि फोन जेल के भीतर पहुंचने के पीछे सर्च प्रक्रिया में लापरवाही या किसी स्तर पर चूक हो सकती है। उन्होंने यह भी संभावना जताई कि कैदी ने तलाशी के दौरान फोन छिपाने के लिए किसी तरह की चालाकी की हो।
‘सर्च में कोई कमी हुई’
किरण बेदी के मुताबिक, यदि कोई स्मार्टफोन जेल के भीतर पहुंच गया और बाद में कैदी के बैरक से बरामद हुआ, तो इसका मतलब है कि प्रवेश के समय सुरक्षा जांच में कोई कमी रह गई थी।
उन्होंने कहा कि आज जेलों में इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा प्रणालियां और जांच के आधुनिक साधन मौजूद हैं। ऐसे में मोबाइल फोन जैसी वस्तु का अंदर पहुंचना सामान्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है।
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इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के बावजूद कैसे पहुंचा फोन?
पूर्व IPS अधिकारी ने जेलों में मौजूद आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जेलों में प्रवेश के दौरान इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और अन्य जांच तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनसे कई प्रतिबंधित वस्तुओं का पता लगाया जा सकता है।
ऐसे में यह जांच का विषय है कि कथित मोबाइल फोन जेल के अंदर कैसे पहुंचा और तलाशी के दौरान सुरक्षाकर्मियों की नजर से कैसे बच गया।
जेल प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल
इस घटना के बाद जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जेलों में मोबाइल फोन प्रतिबंधित वस्तुओं में शामिल होते हैं और कैदियों को बाहरी संचार के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होता है।
यदि किसी हाई-प्रोफाइल कैदी के पास स्मार्टफोन पाया जाता है, तो यह न केवल सुरक्षा में चूक का मामला बनता है, बल्कि जेल के अंदर प्रतिबंधित वस्तुओं की निगरानी और नियंत्रण की व्यवस्था की भी समीक्षा की जरूरत पैदा करता है।
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प्रज्वल रेवन्ना पर पहले से गंभीर मामले
प्रज्वल रेवन्ना कर्नाटक के पूर्व सांसद हैं और उनके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक आरोपों से जुड़े मामले चल रहे हैं। ऐसे में जेल में उनके बैरक से कथित तौर पर मोबाइल फोन बरामद होने की खबर ने मामले को और चर्चा में ला दिया है।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि फोन जेल के अंदर कब और किस माध्यम से पहुंचा, उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
किरण बेदी की प्रतिक्रिया ने इस पूरे मामले में जेल की तलाशी व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर बहस को और तेज कर दिया है। उनके मुताबिक, ऐसी घटना के पीछे सबसे पहले प्रवेश के समय हुई तलाशी और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया की समीक्षा की जानी चाहिए।
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