
AI के दौर में डिग्री नहीं, स्किल की डिमांड! इन प्रोफेशनल्स को मिल रही 3 गुना तक सैलरी…
AI Professionals in India: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने भारत के जॉब मार्केट की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। कंपनियां अपने कारोबार में एआई तकनीक को तेजी से अपना रही हैं, लेकिन इस क्षेत्र में कुशल पेशेवरों की कमी बड़ी चुनौती बन गई है। मांग और उपलब्धता के बीच बढ़ते अंतर के कारण अब कंपनियां अनुभवी कर्मचारियों के साथ-साथ एआई में विशेषज्ञता रखने वाले युवाओं को भी प्राथमिकता दे रही हैं। इसका असर वेतन और करियर ग्रोथ पर भी दिखाई दे रहा है।
भारत में 14 लाख AI प्रोफेशनल्स की जरूरत, उपलब्ध सिर्फ 4 लाख
रिपोर्ट में दिए गए अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2026 तक भारत में करीब 14 लाख एआई पेशेवरों की जरूरत हो सकती है, जबकि उपलब्ध पेशेवरों की संख्या लगभग 4 लाख बताई गई है। यह अंतर बताता है कि एआई से जुड़े कौशल की मांग कितनी तेजी से बढ़ रही है।
कंपनियों को केवल एआई टूल इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे विशेषज्ञ चाहिए जो एआई सिस्टम तैयार कर सकें, उन्हें व्यावसायिक प्रक्रियाओं में लागू कर सकें और उनके लिए जरूरी तकनीकी ढांचे का प्रबंधन कर सकें।
क्लाउड और जेनरेटिव AI में सबसे ज्यादा कमी
टीमलीज की रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कौशलों की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है। क्लाउड क्षेत्र में करीब 55 से 60 प्रतिशत और जेनरेटिव एआई में लगभग 53 प्रतिशत की कमी बताई गई है। साइबर सुरक्षा में भी 25 से 30 प्रतिशत का अंतर मौजूद है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कंपनियों को एआई के साथ-साथ क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा इंजीनियरिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता है। इन तकनीकों को एक साथ समझने वाले पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
डिग्री के साथ प्रैक्टिकल स्किल भी जरूरी
भारत के विश्वविद्यालयों से हर साल बड़ी संख्या में टेक्नोलॉजी ग्रेजुएट निकलते हैं, लेकिन सभी के पास उद्योग की जरूरत के अनुरूप व्यावहारिक कौशल नहीं होते। तकनीक में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण पारंपरिक पाठ्यक्रमों और कंपनियों की वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर दिखाई दे रहा है।
इसी वजह से कंपनियां कर्मचारियों को रीस्किलिंग और अपस्किलिंग कार्यक्रमों के जरिए नई तकनीक सिखा रही हैं। एआई मॉडल के विकास, डेटा विश्लेषण, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और वास्तविक व्यावसायिक समस्याओं को हल करने का अनुभव नौकरी पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बैंकिंग से लेकर हेल्थकेयर तक बढ़ रहा AI का इस्तेमाल
एआई का इस्तेमाल अब केवल आईटी कंपनियों तक सीमित नहीं है। वित्तीय सेवाओं, खुदरा कारोबार, स्वास्थ्य सेवा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी इसका दायरा बढ़ रहा है।
- बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं: धोखाधड़ी की पहचान, जोखिम का आकलन और ग्राहक सहायता।
- रिटेल सेक्टर: ग्राहकों की मांग का अनुमान, कीमतों का निर्धारण और मार्केटिंग।
- आईटी सेक्टर: सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कोड टेस्टिंग और तकनीकी सहायता।
- हेल्थकेयर: मेडिकल इमेजिंग, मरीजों के प्रबंधन और उपचार संबंधी निर्णयों में सहायता।
- लॉजिस्टिक्स: सप्लाई चेन का प्रबंधन, डिलीवरी की योजना और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल।
इन क्षेत्रों में एआई के विस्तार के साथ ऐसे पेशेवरों की मांग बढ़ रही है, जो तकनीकी ज्ञान को व्यावहारिक जरूरतों के साथ जोड़ सकें।
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AI विशेषज्ञों की सैलरी में 30 से 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
एआई विशेषज्ञों की कमी का असर उनके वेतन पर भी पड़ रहा है। बिनक्यूल की रिपोर्ट के अनुसार, तकनीक से जुड़ी विशेष भूमिकाओं में वेतन 30 से 35 प्रतिशत तक बढ़ा है। हालांकि, वास्तविक वेतन वृद्धि भूमिका, अनुभव, कंपनी और कौशल के स्तर पर निर्भर करती है।
टीमलीज डिजिटल के अनुसार, अब वेतन तय करने में एआई विशेषज्ञता की गहराई महत्वपूर्ण होती जा रही है। जेनरेटिव एआई और मशीन लर्निंग जैसी एआई-कोर भूमिकाओं में शुरुआती वेतन, एआई-सपोर्ट भूमिकाओं की तुलना में 2.5 से 3 गुना तक अधिक हो सकता है।
अनुमानों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027-28 के दौरान एआई-कोर पदों के वेतन में 16 से 21 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है, जबकि एआई-सपोर्ट भूमिकाओं में यह बढ़ोतरी 7 से 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ये अनुमान हैं, निश्चित वेतन वृद्धि की गारंटी नहीं।
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कंपनियों और युवाओं के लिए क्या है इसका मतलब?
एआई विशेषज्ञों की कमी कंपनियों को भर्ती और प्रशिक्षण की रणनीति बदलने के लिए प्रेरित कर रही है। केवल बाहरी उम्मीदवारों पर निर्भर रहने के बजाय कंपनियों को अपने मौजूदा कर्मचारियों के कौशल को बेहतर बनाने में निवेश करना पड़ सकता है।
वहीं, नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह संकेत है कि केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। एआई, मशीन लर्निंग, डेटा इंजीनियरिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक ज्ञान और प्रोजेक्ट आधारित अनुभव रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
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