
‘हिम्मत कैसे हुई…’, CJP प्रोटेस्ट पर छात्र को नोटिस भेजने पर नाराज हुआ सुप्रीम कोर्ट
Supreme Court: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छात्रों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है। शीर्ष अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के दूसरे वर्ष के एक छात्र को पांच लाख रुपये का कारण बताओ नोटिस जारी करने पर CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ बेहद नाराज हो गई।
अदालत ने कड़े शब्दों में सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर सख्त रोक लगा रखी थी, तब मजिस्ट्रेट ने ऐसा नोटिस जारी करने का दुस्साहस कैसे किया।
SC के आदेश के बावजूद जारी हुआ नोटिस
मामला ग्रेटर नोएडा की गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के सेकेंड ईयर के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा हुआ है। पुलिस रिपोर्ट के आधार पर एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट III ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत छात्र को नोटिस जारी कर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 5-5 लाख रुपये के मुचलके और दो जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया था।
नोएडा पुलिस ने आरोप लगाया था कि छात्र जंतर-मंतर पर CJP के बैनर तले आयोजित आंदोलन में छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़का रहा था।
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‘यह सीधे तौर पर अदालत की अवमानना’
वरिष्ठ अधिवक्ता बिस्वजीत भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस मामले को उठाया। उन्होंने बताया कि हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस ने अब नोटिस वापस ले लिया है, लेकिन यह भारत के छात्रों पर किया जा रहा एक ‘प्रयोग’ और डर का माहौल बनाने की कोशिश है।
वकील ने जोर देकर कहा कि केवल नोटिस वापस ले लेने से अवमानना का अपराध खत्म नहीं हो जाता। यह इस देश की सर्वोच्च अदालत की अवहेलना का सीधा मामला है।
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सुप्रीम कोर्ट ने मांगा औपचारिक हलफनामा
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कड़े लहजे में कहा, “जब हमने बहुत स्पष्ट आदेश दिया था कि किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन कैसे कर सकता है?”
अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील को इस नोटिस और मामले से जुड़े सभी तथ्यों को रिकॉर्ड पर लाने के लिए औपचारिक याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अथॉरिटी और एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट से जवाब-तलब करेगा।
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