हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की ताकत, नौसेना को मिलेंगे तीन स्वदेशी युद्धपोत…

Indian Navy: भारतीय नौसेना जल्द ही अपनी समुद्री ताकत को और मजबूत करने जा रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों और चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी के बीच भारतीय नौसेना अपने बेड़े में तीन अत्याधुनिक स्वदेशी जहाज शामिल करेगी। इनमें स्टेल्थ फ्रिगेट ‘दूनागिरी’, पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत ‘अग्रय’ और सर्वे जहाज ‘संशोधक’ शामिल हैं।

अधिकारियों के मुताबिक इन तीनों जहाजों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की ऑपरेशनल क्षमता और निगरानी तंत्र को बड़ी मजबूती मिलेगी। खासतौर पर चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों पर नजर रखने में यह जहाज अहम भूमिका निभाएंगे।

स्वदेशी रक्षा निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
इन तीनों जहाजों का निर्माण Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) ने कोलकाता में किया है। हाल ही में इन्हें भारतीय नौसेना को सौंपा गया है।

सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वदेशी रक्षा निर्माण अभियान के तहत इन जहाजों को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अत्याधुनिक तकनीकों से लैस ये पोत भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता को नई ऊंचाई देंगे।

क्या हैं इन जहाजों की खासियत?

दूनागिरी: अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट
‘दूनागिरी’ एक एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे दुश्मन के रडार से बचते हुए लंबी दूरी तक मिशन संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह आधुनिक मिसाइल सिस्टम और निगरानी उपकरणों से लैस है।

अग्रय: पनडुब्बी रोधी युद्धपोत
‘अग्रय’ विशेष रूप से दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है। हिंद महासागर में बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों के बीच इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

संशोधक: आधुनिक सर्वे जहाज
‘संशोधक’ एक हाईटेक सर्वे वेसल है, जो समुद्री मानचित्रण, समुद्र की गहराई मापने और रणनीतिक डेटा जुटाने में मदद करेगा। इससे नौसेना की नेविगेशन और ऑपरेशनल प्लानिंग और अधिक सटीक हो सकेगी।

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हिंद महासागर में बढ़ रही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
पिछले कुछ वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की सक्रियता तेजी से बढ़ी है। चीनी नौसेना के युद्धपोत और रिसर्च वेसल लगातार इस क्षेत्र में देखे जा रहे हैं।

भारत लंबे समय से इस क्षेत्र को अपनी रणनीतिक सुरक्षा का अहम हिस्सा मानता रहा है। ऐसे में नए जहाजों की तैनाती भारतीय नौसेना को समुद्री निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में बड़ी बढ़त दे सकती है।

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नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों के मुताबिक इन जहाजों का शामिल होना केवल सैन्य शक्ति बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और निर्माण क्षमता का भी बड़ा प्रदर्शन है।

भारतीय नौसेना पहले से ही अपने बेड़े के आधुनिकीकरण पर तेजी से काम कर रही है। आने वाले वर्षों में कई और स्वदेशी युद्धपोत, पनडुब्बियां और ड्रोन सिस्टम नौसेना में शामिल किए जाने की योजना है।

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