Mamata Banerjee ने खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा, भवानीपुर नतीजों पर उठाए सवाल

West Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख Mamata Banerjee ने भवानीपुर विधानसभा सीट पर अपनी हार को चुनौती देते हुए Calcutta High Court का दरवाजा खटखटाया है। ममता बनर्जी ने भाजपा नेता Suvendu Adhikari की जीत को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका और हलफनामा दायर किया है।

इस कदम के साथ ही पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में से एक अब राजनीतिक मंच से निकलकर न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन गई है। तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों में कथित अनियमितताओं और मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है।

अचानक हाई कोर्ट पहुंचीं ममता
मंगलवार दोपहर ममता बनर्जी पार्टी की वरिष्ठ नेता Dola Sen और विधायक Kunal Ghosh के साथ अचानक कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं। उनकी इस अप्रत्याशित मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी।

बाद में यह स्पष्ट हुआ कि वह भवानीपुर सीट के चुनाव परिणाम को चुनौती देने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करने पहुंची थीं। अदालत में दाखिल याचिका में चुनाव परिणाम की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।

15 हजार से अधिक वोटों से मिली थी हार
अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट पर भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया था। यह परिणाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर माना गया था, क्योंकि भवानीपुर लंबे समय तक ममता बनर्जी का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है।

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद ही ममता बनर्जी ने मतगणना प्रक्रिया में गड़बड़ी और अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि कई स्तरों पर वोटों की गणना को लेकर गंभीर सवाल हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

नंदीग्राम की लड़ाई अभी भी जारी
यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने चुनावी हार को अदालत में चुनौती दी है। इससे पहले वर्ष 2021 में नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भी शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें हराया था। उस चुनाव परिणाम को भी ममता बनर्जी ने अदालत में चुनौती दी थी।

नंदीग्राम मामले में दायर याचिका पर कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी है। अब भवानीपुर सीट का विवाद भी अदालत पहुंचने के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मुकाबला एक बार फिर कानूनी मोर्चे पर दिखाई देगा।

TMC और BJP के बीच बढ़ेगा टकराव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी की इस याचिका के बाद तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। भाजपा इसे जनता के फैसले का अपमान बता सकती है, जबकि टीएमसी इसे लोकतांत्रिक अधिकार और चुनावी पारदर्शिता की लड़ाई के रूप में पेश कर सकती है।

भवानीपुर सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रतीकात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में इस मामले का असर आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

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कानूनी प्रक्रिया पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजर हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है। अदालत यह तय करेगी कि ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया कितनी गंभीरता है और क्या चुनाव परिणाम की समीक्षा या जांच की आवश्यकता है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव याचिकाओं की सुनवाई लंबी प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन यदि अदालत को पर्याप्त आधार दिखाई देता है तो मामले की विस्तृत जांच के आदेश भी दिए जा सकते हैं।

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बंगाल की राजनीति में फिर बढ़ी हलचल
भवानीपुर चुनाव परिणाम को चुनौती देने के फैसले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ ममता बनर्जी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही हैं, तो दूसरी ओर भाजपा इसे जनता के जनादेश को स्वीकार न करने की कोशिश बता रही है।

आने वाले दिनों में यह मामला केवल अदालत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की राजनीति में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच चल रही प्रतिद्वंद्विता अब एक नए अध्याय में प्रवेश कर चुकी है।

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