जहरीली हवा में घुट रहा Lucknow का दम, सांस और हार्ट पेशेंट के लिए खतरा

Lucknow Chokes Under Toxic Air: राजधानी लखनऊ में शुक्रवार की सुबह धुंध की मोटी चादर में लिपटी नजर आई। इस वजह से सुबह में दृश्यता 800 मीटर तक सिमट गई। वहीं, धुंध व कोहरे के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी रही।

Lucknow Chokes Under Toxic Air: तहज़ीब, नवाबी शान और अपनी नफासत के लिए मशहूर शहर लखनऊ इन दिनों एक ऐसी सच्चाई से जूझ रहा है, जिसके सामने उसकी चमक और रंगत भी फीकी पड़ती दिख रही है। शहर की सुबहें अब कोहरे से नहीं, बल्कि प्रदूषण की बारीक धुंध से शुरू हो रही हैं। रातें धुएं की परत ओढ़कर सो रही हैं। लखनऊ का Air Quality Index (AQI) पिछले कई दिनों से “खराब” से “बहुत खराब” श्रेणी के बीच झूल रहा है। कई इलाकों में यह 300 से ऊपर दर्ज हुआ,जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भाषा में “slow poison” यानी धीमा लेकिन खतरनाक जहर है। शहर की मुस्कान अभी भी कायम है, लेकिन उसकी सांसें अब साफ तौर पर भारी सुनाई देने लगी हैं।

लखनऊ की हवा इतनी खराब क्यों

विशेषज्ञों के अनुसार, राजधानी में प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारण निम्न हैं

बढ़ते वाहन-  लखनऊ में वाहनों की संख्या पिछले 10 वर्षों में दोगुनी से अधिक हो चुकी है। हर दिन शहर की सड़कों पर 10–12 लाख गाड़ियां दौड़ती हैं। पेट्रोल-डीजल का धुआं PM 2.5 का सबसे बड़ा स्रोत है।

खुले निर्माण स्थल- चारबाग, अमौसी, गोमती नगर विस्तार, कैसरबाग, आलमबाग सहित कई इलाकों में बड़े-बड़े निर्माण कार्य चल रहे हैं। इनसे निकलने वाली धूल हवा में उड़कर प्रदूषण को कई गुना बढ़ा देती है।

कचरा जलाने की घटनाएं- सर्दी बढ़ते ही लोग और कई सफाईकर्मी गली-मोहल्लों में कचरा जलाने लगते हैं। यह PM 10 और कार्बन मोनोऑक्साइड के स्तर को तेजी से बढ़ाता है।

घटती हरियाली- विकास परियोजनाओं और शहरीकरण के नाम पर हजारों पेड़ कट गए। गोमती किनारे की हरियाली राहत देती है, लेकिन पूरा शहर संभालने के लिए वह नाकाफी हो चुकी है।

प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने बिगाड़ा स्वास्थ्य ग्राफ

लखनऊ के प्रमुख इलाकों गोमती नगर, हजरतगंज, चारबाग, अलीगंज, आशियाना और इंदिरा नगर में हवा का स्तर लगातार खराब होता जा रहा है। मौसम विभाग और CPCB के आंकड़े बताते हैं कि हवा में मौजूद PM 2.5 और PM 10 कण सामान्य मानक से कई गुना ज्यादा दर्ज हो रहे हैं। सर्दियों में हवा जमीन के करीब रुक जाती है और प्रदूषक ऊपर नहीं जा पाते। इससे AQI तेजी से खराब होता है।

जहरीली हवा में घुट रहा Lucknow

इसका सीधा असर स्वास्थ्य पर बढ़ते श्वसन रोग,गले में खराश,आंखों में जलन,सीने में भारीपन,अस्थमा के मामले चरम पर,हार्ट पेशेंट्स में जोखिम बढ़ा बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह हवा बेहद खतरनाक है, क्योंकि उनके फेफड़े प्रदूषण को झेल नहीं पाते। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) और SGPGI में पिछले 15 दिनों में सांस से जुड़े मरीजों की संख्या में 20–25% की वृद्धि दर्ज हुई है। पर्यावरण कार्यकर्ता छोटे-छोटे प्रयासों का बड़ा असर बताते हैं,जैसे-पेड़ लगाना, पौधों की रखवाली, प्लास्टिक कम करना, कचरा न जलाना इत्यादि।

 

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