UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, कहा- जांच की जरूरत…

Supreme Court on UGC New Guidelines: सुप्रीम कोर्ट आज उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाली नियमावली, 2026 पर फिलहाल रोक लगा दी है। इन नए नियमों पर आरोप लगाया गया था कि ये सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं।

Supreme Court on UGC New Guidelines: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा है कि प्रथम दृष्टया ऐसा लग रहा है कि नियमों की भाषा में स्पष्टता नहीं है. इसलिए इसकी जांच की जरूरत है ताकि नियमों का दुरुपयोग न किया जा सके. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि नियम पहली नजर में साफ नहीं है और उनका गलत इस्तेमाल हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन से रेगुलेशन को फिर से बनाने को कहा, तब तक इसके ऑपरेशन पर रोक रहेगी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब किया. एसजी से कहा कि आप जवाब दें और एक कमेटी गठित करें.

सुप्रीम कोर्ट ने और क्या-क्या कहा?

पीठ ने कहा, ‘इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इसका दुरुपयोग हो सकता है। हमें उस स्थिति में नहीं जाना चाहिए जहां स्कूलों को अलग-अलग कर दिया जाए, जैसे कि अमेरिका में होता है। वहां श्वेतों के लिए अलग स्कूल की व्यवस्था होती है। भारत में शिक्षण संस्थानों को एकता दिखानी चाहिए।’ कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए कहा है। 19 मार्च को इस मामले पर अगली सुनवाई होगी।

आपको बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा वर्ष 2026 में लागू किए गए इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा में समानता सुनिश्चित करना है, लेकिन याचिकाकर्ताओं का तर्क इसके बिल्कुल विपरीत है। अधिवक्ता मृत्युंजय तिवारी, विनीत जिंदल और राहुल दीवान द्वारा दायर इन याचिकाओं में कई आपत्तियां उठाई गई हैं।

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याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ये नियम समानता के नाम पर सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के हितों को नुकसान पहुंचाएंगे। दलील दी गई है कि नए नियम योग्यता और समानता के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं। याचिकाओं में कहा गया है कि नियमावली का वर्तमान स्वरूप समावेशी होने के बजाय एक वर्ग विशेष के प्रति झुकाव रखता है, जिससे सामान्य वर्ग के अवसर सीमित हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, ‘क्या हम उल्दी दिशा में जा रहे हैं? हमें जातिविहीन समाज की तरफ बढ़ना चाहिए। जिन्हें सुरक्षा चाहिए उनके लिए व्यवस्था हो।’

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