
यात्रियों की सुरक्षा से समझौता नहीं! रेलवे को सुप्रीम कोर्ट की फटकार…
कवच सिस्टम, रेलवे पटरियों पर बाड़ और फुट ओवरब्रिज बनाने में देरी पर कोर्ट ने जताई नाराजगी; 16 नवंबर 2026 को अगली सुनवाई।
New Delhi: रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े उपायों को लागू करने में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। ट्रेनों की टक्कर रोकने वाले कवच सिस्टम को लागू करने, रेलवे पटरियों के आसपास बाड़ लगाने और फुट ओवरब्रिज बनाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की धीमी प्रगति पर अदालत ने रेलवे से जवाब मांगा है। कोर्ट ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों से सुरक्षा उपायों की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यात्री सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन पर ठोस प्रगति दिखाई देनी चाहिए। अदालत ने सुरक्षा सुधारों को लेकर रेलवे के रवैये पर असंतोष जताते हुए अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया।
कवच सिस्टम लागू करने में देरी पर सवाल
रेलवे में कवच एक स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य निर्धारित परिस्थितियों में ट्रेन चालकों को सहायता देना और टक्कर जैसी दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना है। इसके विस्तार और प्रभावी क्रियान्वयन को यात्री सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
अदालत ने इस प्रणाली को लागू करने की गति पर सवाल उठाते हुए रेलवे से प्रगति का विवरण मांगा है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना और उसके प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत पर भी ध्यान दिलाया गया।
पटरियों पर बाड़ और फुट ओवरब्रिज का मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे पटरियों के आसपास बाड़ लगाने और फुट ओवरब्रिज बनाने में देरी पर भी चिंता जताई। पटरियों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने से अनधिकृत प्रवेश और दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, फुट ओवरब्रिज यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक सुरक्षित पहुंचने का रास्ता उपलब्ध कराते हैं।
अदालत ने इन उपायों की धीमी प्रगति पर सवाल उठाते हुए रेलवे अधिकारियों से जवाब मांगा है। मामले में सुरक्षा कार्यों की वास्तविक स्थिति और उन्हें पूरा करने की समयसीमा महत्वपूर्ण होगी।
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सुरक्षा बजट के इस्तेमाल पर भी उठे सवाल
अदालत ने यात्री सुरक्षा के लिए किए गए बजटीय प्रावधानों के पूर्ण उपयोग को लेकर भी चिंता जताई। कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार, सुरक्षा सुधारों के लिए धन उपलब्ध होने के बावजूद उनके क्रियान्वयन में अपेक्षित प्रगति नहीं दिख रही है।
इस मुद्दे के जरिए रेलवे में सुरक्षा योजनाओं की निगरानी, बजट के प्रभावी इस्तेमाल और अधिकारियों की जिम्मेदारी पर ध्यान केंद्रित हुआ है।
16 नवंबर 2026 को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को निर्धारित है। इस दौरान रेलवे में सुरक्षा उपायों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों से मांगा गया जवाब आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण हो सकता है।
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काउंटर टिकट पर यात्रा बीमा का भी मुद्दा
सुनवाई के दौरान अदालत ने काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को यात्रा बीमा सुरक्षा देने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रेलवे के बड़ी संख्या में यात्री अभी भी टिकट काउंटरों से टिकट खरीदते हैं। काउंटर टिकट यात्रियों को बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था और उससे जुड़ी शर्तों पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी से रेलवे में यात्री सुरक्षा उपायों को समय पर लागू करने, उपलब्ध बजट का प्रभावी इस्तेमाल करने और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का मुद्दा फिर चर्चा में है। अब अगली सुनवाई में सुरक्षा कार्यों की प्रगति और रेलवे के जवाब पर नजर रहेगी।
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