बच्चों के सामने हुई हैवानियत पर Pak कोर्ट का बड़ा फैसला… कायम रखी मौत की सजा

Pakistan News: पाकिस्तान की एक हाईकोर्ट ने 2020 में लाहौर के पास एक फ्रांसीसी महिला पर्यटक से उसके बच्चों के सामने गैंगरेप करने वाले दो दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा है। यह मामला उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था और दुनियाभर में भारी आक्रोश देखने को मिला था।

यह दर्दनाक घटना सितंबर 2020 में लाहौर-सियालकोट मोटरवे पर हुई थी। फ्रांस की महिला अपने तीन बच्चों के साथ यात्रा कर रही थी, तभी देर रात उसकी कार का पेट्रोल खत्म हो गया और वह सुनसान इलाके में फंस गई। इसी दौरान दो आरोपियों ने महिला और उसके बच्चों को निशाना बनाया।

बच्चों के सामने हुई थी दरिंदगी
रिपोर्ट्स के अनुसार महिला अपने बच्चों के साथ सड़क किनारे मदद का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर हथियार के बल पर महिला को झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया। इस पूरी घटना के दौरान उसके बच्चे भी मौके पर मौजूद थे।

घटना सामने आने के बाद पाकिस्तान ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर पाकिस्तान सरकार की कड़ी आलोचना हुई थी।

जांच और गिरफ्तारी के बाद चला मुकदमा
घटना के बाद पाकिस्तान पुलिस ने बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया था। तकनीकी साक्ष्यों, डीएनए जांच और अन्य सुरागों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बाद में विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी।

अब हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोषियों की फांसी की सजा कायम रखी है। अदालत ने मामले को बेहद गंभीर और अमानवीय अपराध करार दिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठे थे सवाल
इस घटना ने पाकिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर वैश्विक बहस छेड़ दी थी। कई मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने घटना की कड़ी निंदा की थी।

फ्रांस सरकार ने भी मामले पर चिंता जताई थी। सोशल मीडिया पर लोगों ने पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।

पुलिस अधिकारियों के बयान पर भी हुआ था विवाद
घटना के बाद पाकिस्तान के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के बयान को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। अधिकारी ने महिला के रात में अकेले यात्रा करने को लेकर टिप्पणी की थी, जिसके बाद सरकार और पुलिस प्रशासन की काफी आलोचना हुई थी।

महिला अधिकार संगठनों ने इसे पीड़िता को दोष देने वाली मानसिकता बताया था और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

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महिला सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
हालांकि अदालत के फैसले को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ सख्त सजा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता पर भी काम करने की जरूरत है।

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दुनिया भर में चर्चा में रहा मामला
2020 का यह मामला लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बना रहा। बच्चों के सामने हुई इस दरिंदगी ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था।

अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है, जबकि पाकिस्तान में महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

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