‘आत्मनिर्भरता’ को राष्ट्रीय नीति के तौर पर अपनायाःRajnath Singh

संकट में खुद के हथियार ही काम आते हैं:रक्षा मंत्री 

India’s Defence Minister Rajnath Singh: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राजस्थान के एयर फोर्स स्टेशन जोधपुर में मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज ‘तरंग शक्ति 2026’ के कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री भारत की सैन्य शक्ति और आने वाली परियोजनाओं का जिक्र किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा भविष्य की सैन्य ताकत का अंदाजा हमारे पास मौजूद प्लेटफॉर्म्स की संख्या से नहीं, बल्कि चीजों को भांपने, समझने, फैसला लेने और कार्रवाई करने की रफ्तार से लगाया जाएगा। रफ्तार, सटीकता, जानकारी और तालमेल ही अब असली पहचान हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने कई साल पहले ही यह समझ लिया था कि आने वाला समय राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूती की कई अप्रत्याशित तरीकों से परीक्षा लेगा। हमने आने वाली उथल-पुथल और रुकावटों का पहले ही अंदाजा लगा लिया था और उनसे खुद को सुरक्षित रखने का फैसला किया था। यह विजन हमारी राष्ट्रीय ताकत की नींव है। इसी विजन से प्रेरित होकर भारतीय सशस्त्र बल संरचना, संसाधनों और रणनीति के स्तर पर एक बड़े बदलाव से गुजर रहे हैं। मुझे लगता है कि ‘तरंग शक्ति’ भारत की हवाई ताकत के क्षेत्र में शानदार यात्रा पर विचार करने का एक उपयुक्त अवसर है। हमने आधुनिक शासन-कला की एक कठोर सच्चाई को समझा। संकट के समय, कोई भी देश लंबे समय तक चलने वाले युद्ध तब तक नहीं लड़ सकता जब तक कि वह अपने हथियार और जरूरी तकनीकें खुद बनाने में सक्षम न हो। इसी वजह से हमने रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ को अपनी राष्ट्रीय नीति के तौर पर अपनाया।

Indian Air Force अब आधुनिक और सक्षम सेना है:राजनाथ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा आजादी के समय सीमित संसाधनों के साथ काम करने वाली भारतीय वायु सेना अब एक आधुनिक और सक्षम सेना बन चुकी है। आज इसके पास एडवांस्ड एयरक्राफ्ट, सटीक निशाना लगाने वाले हथियार, अत्याधुनिक सेंसर, इंटीग्रेटेड नेटवर्क और लगातार बेहतर होती स्वदेशी तकनीकें मौजूद हैं। जब भी कोई भारतीय विमान आसमान में उड़ान भरता है, तो वह सिर्फ़ एक मशीन की उड़ान नहीं होती; वह भारत के व्यापक एयरोस्पेस इकोसिस्टम की उड़ान होती है। भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन का मतलब दुनिया से अलग-थलग पड़ना नहीं है। इसका मतलब है रक्षा से जुड़ी अहम तकनीकों को डिजाइन करने, विकसित करने, बनाने, उनका रखरखाव करने और उन्हें अपग्रेड करने की घरेलू क्षमता विकसित करना। भारत न केवल अपनी ज़रूरतों के लिए क्षमताएं विकसित कर रहा है, बल्कि भरोसेमंद ग्लोबल डिफेंस सप्लाई चेन में योगदान देने की क्षमता भी बना रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा खास बात यह है कि अब हम एडवांस्ड एयरो-इंजन के विकास और को-प्रोडक्शन (साझा उत्पादन) पर भी जोर दे रहे हैं, ताकि एविएशन टेक्नोलॉजी के सबसे जटिल हिस्से में महारत हासिल की जा सके। हमारा मकसद सिर्फ उपकरण बनाना नहीं है। हमारा मकसद डिज़ाइन करना, इनोवेशन करना, इंटीग्रेट करना और डिलीवर करना है। तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट जैसे स्वदेशी प्रोग्राम, हेलीकॉप्टर डिजाइन और बनाने की हमारी बढ़ती क्षमता, जिसमें ध्रुव, रुद्र और प्रचंड से लेकर एलयूएच तक शामिल हैं, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, एईएसए रडार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और अन-मैन्ड (बिना पायलट वाले) व एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी की बढ़ती रेंज,ये सभी हमारी बढ़ती क्षमता को दिखाते हैं।

कोई भी देश अकेले काम नहीं कर सकता

श्री सिंह  ने कहा भविष्य की बात करें तो, हमारा प्रमुख ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (एमसीए) प्रोग्राम भारत के लिए पांचवीं पीढ़ी की स्टील्थ फाइटर टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करने का रास्ता बनाता है। भविष्य में रक्षा संबंध सिर्फ प्लेटफॉर्म के बारे में नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और भरोसे के बारे में होंगे। भारत उन देशों के साथ इन संभावनाओं को तलाशने के लिए तैयार है जो एक स्थिर, सुरक्षित और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय माहौल के लिए हमारी प्रतिबद्धता को साझा करते हैं। हम जानते हैं कि कोई भी देश अकेले काम नहीं कर सकता। अहम टेक्नोलॉजी, मजबूत सप्लाई चेन, ऑपरेशनल इंटर-ऑपरेबिलिटी और भरोसेमंद साझेदारियां राष्ट्रीय ताकत के लिए तेज़ी से महत्वपूर्ण तत्व बनती जा रही हैं। इसलिए, भारत के लिए मजबूत स्वदेशी क्षमताएं बनाना और भरोसेमंद साझेदारों के साथ सार्थक सहयोग करना, दोनों साथ-साथ चलने चाहिए।

जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम हो:रक्षा मंत्री 

हमें जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम होना चाहिए और साथ ही जब हमारे हित और जिम्मेदारियां एक हों, तो दूसरों के साथ प्रभावी ढंग से काम करने में भी सक्षम होना चाहिए। टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से विकसित हो रही है कि कोई भी एक वायु सेना सिर्फ़ अपने अनुभव से सीखकर काम नहीं चला सकती। इसलिए सामूहिक रूप से सीखना अब सिर्फ वांछनीय नहीं है, यह जरूरी है। इसलिए, बहुराष्ट्रीय अभ्यासों का महत्व सिर्फ उड़ान भरने या अभ्यास किए गए परिदृश्यों में नहीं है। उनका गहरा महत्व सक्षम सेनाओं के साथ प्रभावी ढंग से काम करने, बातचीत करने और तालमेल बिठाने की क्षमता विकसित करने में है, जो एक ही ऑपरेशनल माहौल में अलग-अलग सिस्टम और तरीके ला सकती हैं।

 

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