इलाज के बीच मौत का खतरा! चाइल्ड पीजीआई के ICU में छत का प्लास्टर गिरा

UP News: उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित सेक्टर-30 के सरकारी सुपर स्पेशियलिटी चाइल्ड पीजीआई अस्पताल में बुधवार देर रात एक गंभीर लापरवाही सामने आई, जिसने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और भवन की गुणवत्ता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इमरजेंसी ICU वॉर्ड की छत से प्लास्टर का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर मरीज के बेड पर गिर गया। जिस बेड पर यह हादसा हुआ, वहां कुछ मिनट पहले तक 18 महीने की एक बच्ची भर्ती थी। संयोग से बच्ची उस समय बेड से उतरकर नीचे फर्श पर खेल रही थी, जिससे उसकी जान बाल-बाल बच गई। हालांकि, उसके पिता बेड पर आराम कर रहे थे और प्लास्टर के भारी टुकड़े उनके ऊपर गिरने से वे घायल हो गए।

कुछ मिनटों का अंतर बना जीवन और मौत का फर्क
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्ची की तबीयत खराब होने के कारण उसे अस्पताल के इमरजेंसी ICU वॉर्ड में भर्ती कराया गया था। देर रात वह बेड से उतरकर अपने पिता की निगरानी में फर्श पर खेलने लगी। इसी दौरान उसके पिता कुछ देर के लिए उसी बेड पर लेट गए। तभी अचानक छत का प्लास्टर तेज आवाज के साथ टूटकर सीधे बेड पर गिर पड़ा। अगर बच्ची उस समय बेड पर होती तो हादसा बेहद गंभीर हो सकता था।

घटना के बाद वॉर्ड में अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल के कर्मचारी और अन्य मरीजों के परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे। घायल पिता को प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि बच्ची को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई और कोई गंभीर रूप से घायल भी नहीं हुआ।

प्रशासन ने खाली कराया प्रभावित वॉर्ड
घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित वॉर्ड को तत्काल खाली कराया गया और वहां भर्ती सभी मरीजों को दूसरे वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी, ताकि किसी अन्य हिस्से में भी इसी तरह का खतरा न हो।

इंजीनियरिंग टीम को जांच के निर्देश
चाइल्ड पीजीआई के निदेशक डी.के. सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही इंजीनियरिंग टीम को मौके पर बुलाया गया। उन्होंने कहा कि छत से प्लास्टर गिरने के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी। साथ ही अस्पताल भवन के अन्य हिस्सों का भी तकनीकी निरीक्षण कराया जाएगा, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उन्होंने यह भी कहा कि मरीजों की सुरक्षा अस्पताल की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यदि जांच में किसी प्रकार की निर्माण संबंधी लापरवाही सामने आती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

परिजनों में आक्रोश, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद मरीजों के परिजनों में भारी नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीज पहले ही बीमारी से जूझ रहे होते हैं, ऐसे में अस्पताल भवन की खराब स्थिति उनकी जान के लिए अतिरिक्त खतरा बन रही है।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय-समय पर भवन का निरीक्षण और मरम्मत नहीं कराई जाती। यदि नियमित रखरखाव होता तो छत का प्लास्टर गिरने जैसी घटना को रोका जा सकता था।

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सरकारी अस्पतालों के रखरखाव पर फिर उठे सवाल
यह घटना सरकारी अस्पतालों की आधारभूत संरचना और रखरखाव व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थानों में भवनों का नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट, छतों और दीवारों की समय-समय पर जांच तथा आवश्यक मरम्मत अनिवार्य होनी चाहिए। विशेषकर बच्चों के अस्पतालों में सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

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जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने पूरे भवन की सुरक्षा जांच शुरू कर दी है और प्रभावित हिस्से की मरम्मत कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अब सभी की नजर इंजीनियरिंग टीम की जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि यह हादसा सामान्य टूट-फूट का परिणाम था या फिर निर्माण और रखरखाव में किसी प्रकार की लापरवाही का नतीजा।

यह घटना भले ही किसी बड़े नुकसान में नहीं बदली, लेकिन इसने सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर चेतावनी जरूर दे दी है। मरीजों और उनके परिजनों की मांग है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अस्पतालों की नियमित जांच और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि इलाज के लिए आने वाले लोगों की जान किसी भी तरह के ढांचागत खतरे में न पड़े।

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