
साकेत बिल्डिंग हादसा रोका जा सकता था! MCD अधिकारियों पर गिरी गाज…
Delhi News: दिल्ली के साकेत इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना ने प्रशासनिक लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। अब Municipal Corporation of Delhi की मेयर प्रवेश वाही ने माना है कि अगर समय रहते कार्रवाई की जाती तो इस हादसे को रोका जा सकता था।
जानकारी के मुताबिक हादसे से पहले ही इमारत की स्थिति को लेकर शिकायतें की गई थीं। इमारत के पास बार्बर शॉप चलाने वाले अब्दुल साकिर ने कथित तौर पर पुलिस, एमसीडी और यहां तक कि हाई कोर्ट तक में अवैध निर्माण और बिल्डिंग के खतरनाक होने की शिकायत दर्ज कराई थी। बावजूद इसके संबंधित विभागों ने समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
अवैध निर्माण बना हादसे की वजह
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इमारत में लगातार अवैध निर्माण और अतिरिक्त मंजिलों का काम किया जा रहा था। इससे बिल्डिंग की संरचना कमजोर हो गई थी। आसपास रहने वाले लोगों ने कई बार प्रशासन को इसकी जानकारी दी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
अब मेयर प्रवेश वाही ने स्वीकार किया है कि Municipal Corporation of Delhi के अधिकारियों की लापरवाही इस हादसे की एक बड़ी वजह रही।
लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई
हादसे के बाद एमसीडी ने सख्त कदम उठाते हुए संबंधित अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। मेयर ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
इसके साथ ही साकेत और आसपास के इलाकों में खतरनाक और जर्जर इमारतों की जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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हादसे के बाद इलाके में दहशत
इमारत गिरने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। राहत और बचाव टीमों ने घंटों तक मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकाला। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन पहले चेतावनी को गंभीरता से लेता तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
हादसे के बाद आसपास के लोगों में डर का माहौल है और कई परिवार अब पुराने भवनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।
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दिल्ली में जर्जर इमारतें बनीं चुनौती
Delhi में अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों का मुद्दा लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। हर साल बारिश के मौसम में कई इमारतों के गिरने की घटनाएं सामने आती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित निरीक्षण, सख्त निर्माण नियम और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई से ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। फिलहाल साकेत हादसे ने एक बार फिर राजधानी में बिल्डिंग सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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