
बिजली उपभोक्ताओं को झटका… यूपी में नवंबर से बढ़ी दरें, महंगा होगा बिजली बिल
UPPCL News: उत्तर प्रदेश के नागरिकों को इस महीने बिजली विभाग ने बड़ा झटका दिया है। उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिजली की दरों में 1.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस फैसले के बाद नवंबर महीने से राज्य के 3.45 करोड़ उपभोक्ताओं को बिजली के बढ़े हुए बिल चुकाने होंगे।
नवंबर में आएगा बढ़ा हुआ बिल
पावर कॉर्पोरेशन के अनुसार, यह बढ़ोतरी अगस्त महीने के फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) के समायोजन के तहत की गई है। इस बढ़ोतरी के चलते उपभोक्ताओं से लगभग 82.11 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूले जाएंगे। यानी उपभोक्ताओं को नवंबर के बिजली बिल में औसतन 1.83 प्रतिशत अधिक राशि चुकानी पड़ेगी।
सूत्रों के मुताबिक, फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPPA) नामक यह अधिभार हर महीने बिजली कंपनियों को वास्तविक ईंधन लागत और बिजली खरीद की लागत के हिसाब से तय करने का अधिकार देता है।
नया फार्मूला लागू
बिजली दरें बढ़ाने का निर्णय उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन-2025 के तहत लिया गया है।
इस नियम के अनुसार, जनवरी 2025 से बिजली कंपनियों को प्रत्येक माह स्वचालित रूप से ईंधन अधिभार निर्धारित करने का अधिकार मिल गया है। इसी प्रावधान के तहत नवंबर में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाला गया है।
वित्तीय वर्ष के टैरिफ में भी बढ़ोतरी के संकेत
अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए चल रही टैरिफ निर्धारण प्रक्रिया के बाद बिजली की दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है। यानी दिसंबर या जनवरी में उपभोक्ताओं को एक और झटका लग सकता है।
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उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक बार बिजली की दरें बढ़ने के बाद वे कम नहीं होतीं, इसलिए यह बढ़ोतरी लंबे समय तक प्रभावी रह सकती है।
बिजली दरों में इस वृद्धि से आम जनता की जेब पर असर पड़ना तय है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसान, व्यापारी और औद्योगिक इकाइयों के लिए भी यह निर्णय महंगाई का नया बोझ लेकर आया है।
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जनता में नाराजगी
बिजली दरों में बढ़ोतरी की खबर से उपभोक्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। कई नागरिक संगठनों ने सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग की है। उपभोक्ता फोरम्स का कहना है कि पहले से ही महंगे ईंधन और घरेलू खर्चों के बीच यह कदम आम जनता के लिए “दोहरी मार” साबित होगा।
नवंबर 2025 में लागू हुई यह बढ़ोतरी सिर्फ एक महीने का फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक रह सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उत्पादन लागत और बिजली खरीद की कीमतें आगे भी बढ़ीं, तो आने वाले महीनों में बिजली बिल और भारी हो सकते हैं।
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