‘नाश्ता योजना’ के खर्च पर घिरी तमिलनाडु सरकार, PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदॉस ने उठाए सवाल…

Tamilnadu Breakfast Scheme: तमिलनाडु में 17 सितंबर से कक्षा 8 तक बढ़ेगी मुख्यमंत्री नाश्ता योजना, PMK अध्यक्ष ने हेडमास्टरों से बर्तन और बोर्ड का खर्च कराने पर सरकार को घेरा

Tamil Nadu: तमिलनाडु में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए संचालित पेरुंथलैवर कामराजर नाश्ता योजना (मुख्यमंत्री नाश्ता योजना) के विस्तार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पाट्टाली मक्कल काची (PMK) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदॉस ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि योजना का विस्तार तो किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए जरूरी शुरुआती खर्च का बोझ स्कूलों के प्रधानाध्यापकों पर डाला जा रहा है।

अंबुमणि रामदॉस ने आरोप लगाया कि स्कूलों में नाश्ता योजना के लिए जरूरी बर्तन और बोर्ड आदि की व्यवस्था करने का खर्च हेडमास्टरों को अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है। PMK अध्यक्ष ने सरकार से सवाल किया कि जब यह राज्य सरकार की योजना है तो इसके लिए आवश्यक खर्च स्कूल प्रमुखों से क्यों कराया जा रहा है।

2022 में शुरू हुई थी नाश्ता योजना
तमिलनाडु सरकार ने सितंबर 2022 में सरकारी स्कूलों की कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए नाश्ता योजना शुरू की थी। इस योजना का उद्देश्य बच्चों को स्कूल आने से पहले पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और उनकी पढ़ाई में उपस्थिति एवं एकाग्रता को बेहतर बनाना है।

इसके बाद अगस्त 2023 में योजना का विस्तार सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों तक भी किया गया। अब सरकार इसके दायरे को और बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

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17 सितंबर से कक्षा 8 तक विस्तार की तैयारी
जानकारी के मुताबिक, 17 सितंबर से मुख्यमंत्री नाश्ता योजना को कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिए विस्तारित करने की तैयारी है। योजना के विस्तार के साथ बड़ी संख्या में और विद्यार्थी इसके दायरे में आएंगे।

हालांकि, विस्तार से पहले ही स्कूल स्तर पर संसाधनों की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदॉस का आरोप है कि सरकार को योजना के लिए आवश्यक बुनियादी सामान और अन्य खर्च की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए, न कि प्रधानाध्यापकों पर डालनी चाहिए।

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सरकार से खर्च की जिम्मेदारी उठाने की मांग
अंबुमणि रामदॉस ने राज्य सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि नाश्ता योजना के लिए स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को अपनी जेब से पैसा खर्च न करना पड़े। उन्होंने योजना के विस्तार के साथ पर्याप्त बजट और संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

नाश्ता योजना को लेकर यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब तमिलनाडु सरकार इसे अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। अब देखना होगा कि सरकार PMK अध्यक्ष के इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और स्कूलों में योजना के संचालन के लिए अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था किस तरह की जाती है।

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