‘शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार नहीं छीन सकते’, पीस बॉन्ड पर अड़ीं नेहा बोरा…

Neha Bora Statement: दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने ₹10,000 के शांति मुचलके पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जुड़ा मामला बताते हुए बॉन्ड भरने से मना किया है।

New Delhi: दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को लेकर छात्र राजनीति में विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद भी स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से जारी शांति मुचलके पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है।

नेहा बोरा ने स्पष्ट किया कि वह और उनका संगठन इस बॉन्ड पर दस्तखत नहीं करेंगे। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध के मौलिक अधिकार को प्रभावित करती है।

₹10,000 का पीस बॉन्ड भरने का मिला था नोटिस
मिली जानकारी के मुताबिक, 16 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत ₹10,000 का पीस बॉन्ड भरने के संबंध में कारण बताओ नोटिस दिया गया था।

यह कार्रवाई दिल्ली में SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित प्रदर्शनों के सिलसिले में की गई थी। प्रशासन की ओर से जारी नोटिस को नेहा बोरा ने अदालत में चुनौती दी थी।

हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने इसे खारिज कर दिया। इसके बावजूद नेहा बोरा ने शांति मुचलके पर हस्ताक्षर नहीं करने का अपना रुख बरकरार रखा।

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‘शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार’ का उठा मुद्दा
नेहा बोरा के इस रुख के पीछे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। उनका तर्क है कि पीस बॉन्ड के जरिए नागरिकों के लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।

वहीं, निरोधात्मक कार्रवाई का उद्देश्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत शांति व्यवस्था बनाए रखना है। इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और विरोध के अधिकार के बीच कानूनी सवाल उठ रहे हैं।

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अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद नेहा बोरा का बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना मामले को आगे बढ़ा सकता है। हालांकि, केवल बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने से आगे कौन-सी कानूनी कार्रवाई होगी, यह संबंधित आदेशों, नोटिस की शर्तों और सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, नेहा बोरा ने अपने रुख में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

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