जनता ने जिन्हें नकारा वे संसद में चर्चा नहीं होने देते… सत्र से पहले बोले पीएम मोदी

Parliament Winter Session 2024: महाराष्ट्र और यूपी उपचुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत से बीजेपी जोश में है. और यही जोश सोमवार को संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में दिखाई दिया.

सत्र के शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मीडिया को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि शीतकालीन सत्र में माहौल शीत रहेगा। पीएम मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि शीतकालीन सत्र है और माहौल भी शीत ही रहेगा। 2024 का ये अंतिम कालखंड चल रहा है, देश उमंग और उत्साह के साथ 2025 के स्वागत की तैयारी में भी लगा हुआ है।

सदन में हंगामे पर विपक्षी सांसदों को पीएम ने दी नसीहत
पीएम मोदी ने विपक्षी सांसदों को सुनाते हुए कहा, ‘कुछ मुट्ठीभर लोगों के हुड़दंगबाजी के जरिए संसद को कंट्रोल करने का लगातार प्रयास किया जाता रहा है. ऐसे लोगों को जनता ने भी अस्वीकार किया है.’ हालांकि विपक्षी सांसदों पर पीएम मोदी की इस अपील का असर नहीं दिखा और संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन का पहला घंटा हंगामे की भेंट चढ़ गया.

विशेष है संसद का ये सत्र
पीएम मोदी ने कहा कि संसद का ये सत्र अनेक प्रकार से विशेष है। सबसे बड़ी बात है कि हमारे संविधान की यात्रा का 75वें साल में प्रवेश अपने आप में लोकतंत्र के लिए एक बहुत ही उज्जवल अवसर है। कल संविधान सदन में सब मिलकर संविधान के 75वें वर्ष के उत्सव की शुरुआत करेंगे। संविधान निर्माताओं ने संविधान का निर्माण करते समय एक एक बिंदु पर बहुत विस्तार से बहस की है और तब जाकर ऐसा उत्तम दस्तावेज हमें प्राप्त हुआ है। हमारे संविधान की महत्वपूर्ण इकाई- संसद और हमारे सांसद हैं। पार्लियामेंट में स्वस्थ चर्चा हो, ज्यादा से ज्यादा लोग चर्चा में अपना योगदान दें।

जनता ने जिन्हें नकारा वे संसद में चर्चा नहीं होते देते
प्रधानमंत्री ने कहा ​कि जिन्हें जनता ने लगातार 80-90 बार नकार दिया है, वे संसद में चर्चा नहीं होने देते। वह ना तो लोकतंत्र की भावना का सम्मान करते हैं और ना ही वह लोगों की आकांक्षाओं के महत्व को समझते हैं। लोगों के प्रति उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है, वे जनता को समझ नहीं पाते हैं और इसका परिणाम यह होता है कि वे कभी भी लोगों की उम्मीदों पर भी खरे नहीं उतर पाते।

जनता की उम्मीदों पर खड़ा उतरना है
भारत की संसद से ये संदेश जाना चाहिए कि भारत के मतदाता, उनका लोकतंत्र के प्रति समर्पण हम सबको जनता की भावनाओं पर खरा उतरना ही पड़ेगा. हमने जितना समय गवां दिया उसपर थोड़ा पश्चाताप करें. मैं आशा करता हूं ये सत्र परिणाम करी हो. भारत की वैश्विक गरिमा को बल देने वाला हो. संविधान की गरिमा को बढ़ाने वाला हो. नए ऊर्जा को समाहित करने वाला हो.

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