
ट्रम्प-ग्रीनलैंड विवाद… भारत के लिए वैश्विक व्यापार में चुनौती और अवसर
Donald Trump on Greenland: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड नीति और यूरोपीय देशों पर टैरिफ़ लगाने की धमकी ने वैश्विक व्यापार में अस्थिरता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक़, इसका असर भारत पर भी पड़ेगा और इसे जोखिम और अवसर दोनों के रूप में देखा जा सकता है।
ग्रीनलैंड विवाद… अमेरिका का रणनीतिक कदम
ट्रंप ने कहा कि अगर डेनमार्क, फ़िनलैंड, फ़्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन उनके प्रस्ताव का विरोध करते हैं, तो वह 1 फ़रवरी से इन देशों पर 10 प्रतिशत से शुरू होकर 25 प्रतिशत तक टैरिफ़ लगाएंगे।
ट्रंप का दावा है कि ग्रीनलैंड सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से अमेरिका के लिए अहम है। उनका कहना है कि अगर अमेरिका इसे हासिल नहीं करता, तो चीन और रूस इस क्षेत्र पर नियंत्रण कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत समेत अन्य देशों के व्यापार और निवेश निर्णयों पर भी असर डालेगा।
भारत पर संभावित असर
- वैश्विक बाजार में अस्थिरता: निवेशक सुरक्षित संपत्ति जैसे सोना और चांदी की ओर बढ़ सकते हैं।
- शेयर बाजार पर दबाव: अल्पकालिक उतार-चढ़ाव की संभावना बढ़ सकती है।
- लंबी अवधि में अवसर: अमेरिका-यूरोप टकराव से भारत को व्यापारिक लाभ उठाने का मौका मिल सकता है।
जतिन त्रिवेदी, एलकेपी सिक्योरिटीज़ के रिसर्च एनालिस्ट, के अनुसार, सोना अब पॉज़िटिव दायरे में ट्रेड कर रहा है, जो निवेशकों के लिए राहत का संकेत है।
भारत-यूरोप व्यापार संबंधों में अवसर
- भारत और यूरोप के बीच FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) की बातचीत लंबे समय से रुकी हुई है।
- अमेरिका-यूरोप टकराव के कारण भारत और यूरोप करीब आ सकते हैं, जिससे वार्ता में तेजी आ सकती है।
- इससे फार्मा, टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, ऑटोमोबाइल, सोलर उपकरण और स्टील सेक्टर में व्यापार बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत को अमेरिका पर निर्भरता कम करके नए व्यापारिक साझेदार तलाशने चाहिए।
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अमेरिकी दबाव और भारत की रणनीतिक चुनौतियां
- अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल आयात को लेकर टैरिफ़ लगाए।
- भारत ने रूस से तेल आयात घटाया, ब्रिक्स नौसेनिक अभ्यास से पीछे हट गया और ईरान व वेनेज़ुएला से तेल आयात रोका।
- चाबहार पोर्ट के संचालन में अमेरिकी दबाव ने भारत की रणनीतिक स्थिति चुनौतीपूर्ण बना दी।
सामरिक विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि भारत को अमेरिकी दबाव में फ़ैसले लेने से बचना चाहिए। चीन ने इन परिस्थितियों में फायदा उठाया, जबकि भारत रणनीतिक रूप से पीछे रह गया।
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भारत के लिए सबक और रणनीति
- अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते के बावजूद भविष्य में कोई दबाव से सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
2. भारत को अमेरिका पर एकतरफ़ा निर्भरता कम करनी होगी।
3. यूरोप और अन्य देशों के साथ संतुलित और मजबूत व्यापारिक साझेदारी बनाना आवश्यक है।
ट्रंप की ग्रीनलैंड नीति और टैरिफ़ धमकी ने वैश्विक व्यापार और रणनीतिक स्थिरता में अस्थिरता और अवसर दोनों पैदा किए हैं। भारत के लिए यह स्थिति जोखिम भरी भी है और संभावनाओं से भरी भी। अमेरिका पर निर्भरता कम करके यूरोप और अन्य देशों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करना भारत के दीर्घकालिक हित में लाभकारी साबित हो सकता है।
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