
UP Weather: यूपी में आंधी-बारिश का तांडव; लखनऊ, सीतापुर और गोंडा में भारी तबाही
UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच अचानक आई तेज आंधी और बारिश ने भारी तबाही मचाई है। लखनऊ, सीतापुर और गोंडा में सैकड़ों पेड़ और बिजली के पोल गिर गए।
UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से जारी चिलचिलाती और भीषण गर्मी के बीच अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। राजधानी लखनऊ समेत आसपास के कई जिलों में तेज रफ्तार आंधी और बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण कहीं पेड़ उखड़ गए, तो कहीं ट्रांसफार्मर सहित बिजली के सैकड़ों पोल जमींदोज हो गए।
सीतापुर जिले में आंधी के कारण दीवार गिरने से मलबे में दबकर एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनके पति और तीन बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं, गोंडा में रेल और सड़क यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
लखनऊ में 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चली आंधी
राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के इलाकों में सोमवार देर रात करीब 11:15 बजे अचानक मौसम खराब हो गया। हालांकि, शहरवासियों को रात करीब 10:30 बजे ही मोबाइल पर मौसम खराब होने का अलर्ट मिल चुका था। इसके बाद 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चली और हल्की बौछारें पड़ीं।
इस आंधी-बारिश से लोगों को भीषण गर्मी और तपिश से तो थोड़ी राहत मिली, लेकिन बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। तेज आंधी के कारण गोमतीनगर, इंदिरा नगर, चिनहट, अर्जुनगंज, अयोध्या रोड, उतरेटिया और गोमती नगर विस्तार जैसे बड़े इलाकों में पेड़ की डालियां टूटने से बिजली गुल हो गई।
मौसम साफ होने के बाद भी कई इलाकों में पूरी रात बिजली बहाल नहीं हो सकी। मौसम विभाग के अनुसार, लखनऊ का अधिकतम तापमान सामान्य से 2.1 डिग्री अधिक 42.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.1 डिग्री अधिक 28.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
गोंडा में सैकड़ों पेड़ और ट्रांसफार्मर गिरे
गोंडा जिले के बेलसर, नवाबगंज और वजीरगंज क्षेत्रों में आंधी-तूफान ने भयंकर कहर बरपाया। बेलसर-गोंडा मार्ग पर चांदपुर विजयनगर के पास विशालकाय पेड़ गिरने से सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया। तेज आंधी के कारण सैकड़ों बिजली के खंभे और भारी-भरकम ट्रांसफार्मर उखड़कर जमीन पर गिर गए, जिससे कई कस्बों की बिजली ठप हो गई।

कोतवाली देहात क्षेत्र के बिरसिंहपुर बालक पुरवा में 100 साल पुराना ऐतिहासिक बरगद का पेड़ गिर गया। इस पेड़ के नीचे बंधे करीब डेढ़ दर्जन मवेशी मलबे की चपेट में आ गए, जिसमें से एक भैंस और एक गाय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य मवेशी घायल हो गए। पीड़ित पशुपालकों ने सरकार से आर्थिक मुआवजे की मांग की है।
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