
अस्थि कलश विस्थापन की आशंका पर आंदोलन की चेतावनी, लखनऊ में हुई पूजा-वंदना
Lucknow News: राजधानी लखनऊ स्थित 10 विधानसभा मार्ग पर बने अंबेडकर महासभा परिसर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अस्थि कलश, भगवान बुद्ध की प्रतिमा, बोधि वृक्ष और धम्म चक्र को कथित तौर पर अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की चर्चाओं के बीच बहुजन समाज के विभिन्न संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सोमवार को “डॉ. अंबेडकर अस्थि कलश बचाओ संघर्ष मोर्चा” और बुद्ध-अंबेडकरवादी संगठनों के आह्वान पर बड़ी संख्या में अनुयायी अंबेडकर महासभा परिसर पहुंचे और शांतिपूर्ण पूजा-वंदना कर सरकार से इन प्रतीकों को यथास्थान संरक्षित रखने की मांग की।
कार्यक्रम में शामिल लोगों का कहना था कि यह स्थल केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक केंद्र नहीं बल्कि करोड़ों बुद्ध और अंबेडकर अनुयायियों की आस्था, सम्मान और सामाजिक चेतना का प्रतीक है। इसलिए यहां स्थापित अस्थि कलश, बुद्ध प्रतिमा, बोधि वृक्ष और धम्म चक्र को किसी भी परिस्थिति में अन्यत्र स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए।
MLC के बयान के बाद बढ़ा विवाद
मोर्चा के पदाधिकारियों के अनुसार 14 अप्रैल 2026 को बाबा साहब की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में एक विधान परिषद सदस्य द्वारा यह सुझाव दिया गया था कि अंबेडकर महासभा परिसर में स्थापित अस्थि कलश, बुद्ध प्रतिमा, बोधि वृक्ष और धम्म स्तंभ को ऐशबाग स्थित नव-निर्मित अंबेडकर ट्रस्ट परिसर में स्थानांतरित किया जाए। इस बयान का वीडियो सार्वजनिक होने के बाद बहुजन समाज के बीच व्यापक असंतोष फैल गया।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्होंने इस विषय पर मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखने के लिए कई बार समय मांगा, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद विभिन्न संगठनों ने संयुक्त रूप से आंदोलन की रणनीति बनाने का निर्णय लिया।

ऐतिहासिक महत्व का केंद्र है अंबेडकर महासभा परिसर
संघर्ष मोर्चा के संयोजक और पूर्व कैबिनेट मंत्री के.के. गौतम ने कहा कि यह स्थल ऐतिहासिक और संवैधानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल 1991 को बाबा साहब की पत्नी डॉ. सविता अंबेडकर ने यहां राजकीय सम्मान के साथ अस्थि कलश स्थापित किया था। इसके बाद 1993 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने बोधि वृक्ष का रोपण किया और 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यहां धम्म चक्र स्तंभ का अनावरण किया था।
उन्होंने कहा कि वर्षों से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, न्यायाधीश और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता यहां आकर श्रद्धांजलि अर्पित करते रहे हैं। ऐसे में यह स्थल राष्ट्रीय महत्व की धरोहर बन चुका है।

सामाजिक न्याय की ऐतिहासिक घोषणाओं का गवाह
कार्यक्रम में मौजूद पूर्व एसडीएम राम कुमार गौतम ने कहा कि यह स्थान सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन के कई ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी रहा है। उनके अनुसार, वर्ष 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इसी परिसर से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी। इसी स्थल से समाज कल्याण विभाग के नाम से “हरिजन” शब्द हटाने का निर्णय भी सार्वजनिक किया गया था।
इसके अलावा 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण प्रतिशत में वृद्धि की घोषणा यहीं से की थी। वर्ष 2006 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण लागू करने की घोषणा भी इसी मंच से की थी।
यह भी पढ़ें…
कांग्रेस का बदला चुनावी फॉर्मूला, उम्मीदवार चयन में TVK मॉडल पर विचार…
संविधान के संरक्षण प्रावधानों का हवाला
मोर्चा के नेताओं ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 49 के अनुसार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की धरोहरों का संरक्षण राज्य की जिम्मेदारी है। उनका तर्क है कि जहां संविधान निर्माता बाबा साहब की अस्थियां स्थापित हों, उस स्थल को और अधिक विकसित और संरक्षित किया जाना चाहिए।
डॉ. राजाराम आनंद ने कहा कि यदि सरकार प्रदेशभर में स्थापित बाबा साहब की प्रतिमाओं के संरक्षण की बात करती है तो फिर उनके अस्थि कलश वाले स्थल को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।
यह भी पढ़ें…
भरत तिवारी एनकाउंटर पर यूपी की सियासत में भूचाल! ब्राह्मण समीकरण साधने की होड़
भव्य स्मारक निर्माण की मांग
कार्यक्रम में मौजूद बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मांग की कि अंबेडकर महासभा परिसर को भव्य स्मारक के रूप में विकसित किया जाए। उनका कहना है कि यह स्थान करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक भी है।
सभा के अंत में उपस्थित लोगों ने सरकार से मांग की कि अस्थि कलश, बुद्ध प्रतिमा, बोधि वृक्ष और धम्म चक्र को यथास्थान संरक्षित रखा जाए तथा पूरे परिसर का सौंदर्यीकरण कर इसे राष्ट्रीय स्तर के स्मारक के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि इस स्थल के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गई तो देशभर का बहुजन समाज व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने को मजबूर होगा।
यह भी पढ़ें…





