
पानी की टेंशन होगी खत्म! किशाऊ प्रोजेक्ट से 6 राज्यों को मिलेगा बड़ा फायदा…
Kishau Multipurpose Project: 236 मीटर ऊंचे किशाऊ बांध से मानसूनी पानी का होगा बड़ा भंडारण, UP, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान समेत 6 राज्यों को पेयजल, सिंचाई और बिजली में मिलेगा फायदा।
Delhi: उत्तर भारत की बढ़ती जल और बिजली जरूरतों को पूरा करने की दिशा में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (Kishau Multipurpose Project) को बड़ी पहल माना जा रहा है। करीब 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस राष्ट्रीय परियोजना को लेकर छह राज्यों—उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली—के बीच जल और लागत साझा करने पर सहमति बनने से इसके आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है।
टोंस नदी पर बनेगा विशाल बांध
किशाऊ परियोजना का निर्माण यमुना की प्रमुख सहायक नदी टोंस पर किया जाएगा। यह परियोजना उत्तराखंड के देहरादून जिले और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा के आसपास प्रस्तावित है।
परियोजना के तहत टोंस नदी पर करीब 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा। बांध के पीछे एक विशाल जलाशय तैयार होगा, जिसमें करीब 1,324 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) लाइव स्टोरेज की क्षमता होगी।
छह राज्यों को मिलेगा पानी का लाभ
किशाऊ परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य उत्तर भारत में पानी की बढ़ती मांग को पूरा करना है। मानसून के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त जल को जलाशय में संग्रहित कर उसे सालभर विभिन्न जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इससे पीने के पानी की उपलब्धता, सिंचाई और जल प्रबंधन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। छह राज्यों के बीच जल और परियोजना लागत साझा करने की व्यवस्था इसे एक महत्वपूर्ण अंतर-राज्यीय परियोजना बनाती है।
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बिजली उत्पादन में भी अहम भूमिका
किशाऊ केवल जल भंडारण परियोजना नहीं है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य हरित और पर्यावरण-अनुकूल बिजली का उत्पादन भी है। जलविद्युत उत्पादन के जरिए उत्तर भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में परियोजना की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
जल और ऊर्जा दोनों जरूरतों को एक साथ संबोधित करने के कारण इसे बहुउद्देशीय परियोजना के रूप में विकसित किया जा रहा है।
यमुना के पारिस्थितिकी तंत्र को भी मिलेगा लाभ
टोंस नदी यमुना की महत्वपूर्ण सहायक नदी है। मानसूनी जल के बेहतर प्रबंधन और नियंत्रित जल प्रवाह से यमुना नदी के जल प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा परियोजना सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद कर सकती है।
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क्यों महत्वपूर्ण है किशाऊ प्रोजेक्ट?
किशाऊ परियोजना को उत्तर भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एक ही परियोजना के जरिए जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और नदी प्रबंधन जैसे कई उद्देश्यों को साधने की कोशिश की जा रही है।
छह राज्यों के बीच बनी सहमति के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। लगभग 15,000 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना आने वाले वर्षों में उत्तर भारत की जल और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना साबित हो सकती है।
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