
इराक से अमेरिका की वापसी के बाद किसका दबदबा? ईरान समर्थित मिलिशिया ने साफ कर दिए तेवर
30 सितंबर तक उत्तरी कुर्दिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की होगी पूरी वापसी, एयर डिफेंस सिस्टम भी हटेंगे; ईरान समर्थित मिलिशिया के तेवरों से इराक की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
Iraq US Withdrawal: इराक में करीब 23 साल से चली आ रही अमेरिकी सैन्य मौजूदगी अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। 30 सितंबर तक उत्तरी कुर्दिस्तान क्षेत्र में तैनात बचे हुए अमेरिकी सैनिकों की भी वापसी हो जाएगी। इसके साथ ही अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को भी इराक से हटाया जा रहा है। अमेरिका की इस वापसी के बीच ईरान समर्थित मिलिशिया के तेवरों ने इराक की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
30 सितंबर के बाद क्या बदलेगा?
अमेरिका ने इराक से अपनी सैन्य मौजूदगी कम करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी थी। पिछले साल ज्यादातर अमेरिकी ठिकानों से सैनिकों को वापस बुलाया जा चुका है। अब उत्तरी कुर्दिस्तान में मौजूद सैकड़ों अमेरिकी सैनिकों को भी 30 सितंबर तक इराक से बाहर ले जाने की तैयारी है।
इन अमेरिकी सैनिकों को जॉर्डन समेत पश्चिम एशिया के दूसरे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर स्थानांतरित किया जा सकता है। साथ ही इराक में तैनात अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम भी हटाए जा रहे हैं।
2003 में इराक पहुंचा था अमेरिका
अमेरिका ने 2003 में सद्दाम हुसैन की सरकार को सत्ता से हटाने के लिए इराक में सैन्य अभियान शुरू किया था। सद्दाम शासन के पतन के बाद अमेरिकी सेना लंबे समय तक इराक में मौजूद रही।
2011 में अमेरिकी सैनिकों की वापसी हुई, लेकिन तीन साल बाद हालात फिर बदल गए। 2014 में आतंकी संगठन ISIS ने इराक के बड़े हिस्से में अपना प्रभाव बढ़ाया। ISIS के खिलाफ लड़ाई में मदद के लिए इराकी सरकार ने अमेरिका को दोबारा बुलाया।
अब ISIS की ताकत काफी कमजोर हो चुकी है और उसका प्रभाव मुख्य रूप से छोटे स्लीपर सेल तक सीमित है। ऐसे में अमेरिका ने एक बार फिर इराक से अपनी सैन्य मौजूदगी समेटने का फैसला किया है।
अमेरिका के जाते ही मिलिशिया की चुनौती
अमेरिकी वापसी के बाद इराक सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईरान समर्थित हथियारबंद मिलिशिया को नियंत्रित करने की होगी।
इराकी सरकार का कहना है कि विदेशी सैनिकों की वापसी के बाद गैर-सरकारी संगठनों के पास हथियार रखने का कोई औचित्य नहीं बचता। सरकार चाहती है कि इन समूहों का निरस्त्रीकरण हो और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह राज्य के नियंत्रण में आए।
हालांकि, शक्तिशाली ईरान समर्थित मिलिशिया ने हथियार छोड़ने से इनकार कर दिया है। उनका रुख इराक में आने वाले समय में तनाव बढ़ा सकता है।
यह भी पढ़ें…
AI दुनिया पर कब्जा करेगा या रोबोट इंसानों को मार देंगे? ट्रंप ने दिया चौंकाने वाला जवाब
क्या फिर बढ़ेगा इराक में अस्थिरता का खतरा?
अमेरिकी सैनिकों की वापसी ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया पहले से ही तनाव के दौर से गुजर रहा है। अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम हटने के बाद इराक की सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
अब इराकी सुरक्षा बलों को ISIS के बचे नेटवर्क पर नजर रखने के साथ-साथ ईरान समर्थित मिलिशिया और दूसरे हथियारबंद समूहों से भी निपटना होगा।
यह भी पढ़ें…
बांग्लादेश में अवामी लीग के सात नेताओं को सजा-ए-मौत
अमेरिका की ‘घर वापसी’ से किसे फायदा?
अमेरिका की सैन्य वापसी से इराक की संप्रभुता मजबूत होने का दावा किया जा सकता है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका के जाने के बाद खाली होती सुरक्षा जगह को कौन भरेगा?
अगर इराकी सरकार मिलिशिया को नियंत्रित करने और ISIS के बचे नेटवर्क को खत्म करने में सफल रहती है, तो यह वापसी देश के लिए नए दौर की शुरुआत साबित हो सकती है। लेकिन अगर हथियारबंद समूहों के बीच संघर्ष बढ़ता है, तो अमेरिकी वापसी के बाद इराक में सुरक्षा चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं।
यह भी पढ़ें…





