
Tejashwi के साथ फिर होगा खेल? Bihar MLC चुनाव में समझिए पूरा समीकरण…
Bihar MLC Elections: Bihar में विधान परिषद की 10 सीटों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 9 सीटों पर नियमित चुनाव और 1 सीट पर उपचुनाव के लिए 1 जून से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चुनाव 18 जून को होंगे। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या विपक्ष के नेता Tejashwi Yadav को फिर राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ेगा या महागठबंधन अपनी ताकत बचा पाएगा।
इन सीटों का चुनाव आम जनता नहीं, बल्कि विधायक करते हैं। यही वजह है कि विधानसभा में संख्या बल सबसे बड़ा हथियार बन जाता है और फिलहाल इसका सबसे ज्यादा फायदा एनडीए को मिलता दिखाई दे रहा है।
10 सीटों में क्या है पूरा समीकरण?
इन 10 सीटों में से 9 सीटों पर छह साल के कार्यकाल के लिए चुनाव हो रहा है, जबकि एक सीट पर उपचुनाव होगा। यह सीट पहले Nitish Kumar के पास थी, लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद यह खाली हुई। इस सीट का कार्यकाल अभी चार साल बाकी है, इसलिए यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस सीट पर जेडीयू अपना कोई भरोसेमंद नेता उतार सकती है। हालांकि मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार का नाम भी चर्चा में है, लेकिन कम कार्यकाल होने के कारण पार्टी कोई वरिष्ठ नेता भी चुन सकती है।
किन नेताओं की सीटें हो रही हैं खाली?
जिन नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें भाजपा के सम्राट चौधरी और संजय मयूख, जेडीयू के श्रीभगवान सिंह कुशवाहा, गुलाम गौस, भीष्म सहनी और कुमुद वर्मा, राजद के सुनील कुमार सिंह और मोहम्मद फारूक तथा कांग्रेस के समीर कुमार सिंह शामिल हैं।
इन सीटों के खाली होने के बाद अब नई राजनीतिक बिसात बिछ रही है।
विधानसभा का नंबर गेम क्या कहता है?
Bihar विधानसभा में फिलहाल एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है। भाजपा, जेडीयू, हम और अन्य सहयोगियों को मिलाकर सत्ता पक्ष मजबूत स्थिति में है। इसी कारण माना जा रहा है कि 10 में से 8 सीटें एनडीए आसानी से जीत सकता है।
वहीं विपक्षी महागठबंधन के खाते में केवल एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है। एक सीट पर मुकाबला और रणनीति दोनों अहम होंगे। यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि अगर विपक्ष ने रणनीतिक गलती की तो Tejashwi Yadav को एक बार फिर झटका लग सकता है।
जीत के लिए कितने वोट चाहिए?
इन चुनावों में जीत के लिए एक तय कोटा होता है। कुल वैध वोटों को सीटों की संख्या से विभाजित कर न्यूनतम जीत का आंकड़ा तय किया जाता है।
243 सीटों की विधानसभा में 9 सीट के लिए चुनाव है तो मतदान नियमों के मुताबिक जीत का कोटा वोट डालने वाले विधायकों की संख्या से तय होगा। अगर मानकर चलते हैं कि सारे 243 विधायक ने वोट डाला तो जीत का कोटा तय होगा 243 को 100 से गुणा करके उस नंबर को चुनावी सीट संख्या 9 में 1 जोड़कर यानी 10 से भाग देने पर। ऐसा करने पर नंबर आता है 2430। इसमें 1 जोड़ देंगे तो संख्या होगी 2431। जीत के लिए एक कैंडिडेट के वोट का कोटा 2431 होगा। विधायकों की पहली वरीयता के 1 वोट की कीमत 100 होगी। एक सीट जीतने के लिए कैंडिडेट को कम से कम 2431 वोट चाहिए। सीधी संख्या में 25 विधायकों के समर्थन से एक सीट निकलेगी।
यही वजह है कि यहां केवल संख्या बल ही नहीं, बल्कि रणनीति भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
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क्यों अलग होती है वोटों की गिनती?
एमएलसी चुनाव में वोटों की गिनती साधारण बहुमत से नहीं होती। यहां “सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम” लागू होता है।
विधानसभा में सदस्यों की संख्या 243 है, इसलिए नियम को 243 के आधार पर समझते हैं। चुनाव में मतगणना का आधार वोट डालने वाले विधायकों की संख्या से तय होता है। जैसे राज्यसभा की 5 सीटों के हालिया चुनाव में नियमों के मुताबिक दलीय समीकरण विपक्ष के एक सीट जीतने लायक रहने के बावजूद 4 विपक्षी विधायकों के वोट नहीं डालने से सत्ता पक्ष की जीत में बदल गई थी। इस खेल में वरीयता के मतों का रोल रहा, क्योंकि एक विधायक चुनाव लड़ उम्मीदवारों को पहली, दूसरी, तीसरी या उससे आगे तक की वरीयता के मत दे सकता है।
इस प्रक्रिया में छोटी रणनीतिक गलती भी बड़ा नुकसान करा सकती है।
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तेजस्वी के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?
Tejashwi Yadav के लिए यह चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश का भी सवाल है। विधानसभा चुनाव से पहले अगर महागठबंधन सीटें बचाने में नाकाम रहता है तो इसका सीधा असर विपक्ष की एकजुटता और मनोबल पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर एनडीए इस चुनाव के जरिए यह दिखाना चाहेगा कि बिहार की राजनीति में उसकी पकड़ अभी भी मजबूत है। इसलिए 18 जून का यह चुनाव भले अप्रत्यक्ष हो, लेकिन इसके राजनीतिक संकेत दूर तक जाने वाले हैं।
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