प्राचीन काल में श्रावणी उपाकर्म का विशेष महत्व:डॉ. विवेक तांगड़ी

कपीश्वर वैदिक गुरुकुल में वैदिक परंपरा का आयोजन

लखनऊ। गुरुकुल प्रमुख डॉ. विवेक तांगड़ी हिंदू धर्म की प्राचीन वैदिक परंपराओं एवं संस्कारों में श्रावणी उपाकर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बताया है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि वैदिक जीवन-पद्धति में नवीन आरंभ, आत्मशुद्धि एवं ज्ञानार्जन के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। ‘उपाकर्म’ का शाब्दिक अर्थ है, नवीन रूप से किसी कार्य का आरंभ करना। प्राचीन काल में श्रावणी उपाकर्म का विशेष महत्व था। इसी अवसर पर आश्रमों एवं गुरुकुलों में आचार्य अपने शिष्यों के साथ नवीन अध्ययन-अध्यापन सत्र का शुभारंभ करते थे। यजुर्वेद परंपरा के अनुसार यह पर्व प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के पावन अवसर पर संपन्न किया जाता है। वैदिक परंपराओं के अनुसार श्रावणी उपाकर्म के लिए उचित तिथि एवं काल का विशेष महत्व माना गया है। यदि श्रावण पूर्णिमा के दिन ग्रहण अथवा भद्रा का संयोग हो, तो उपाकर्म को श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन संपन्न करने का विधान बताया गया है। विभिन्न वैदिक शाखाओं एवं परंपराओं में इसके आयोजन की तिथियों एवं विधियों में कुछ भिन्नताएँ भी देखने को मिलती हैं। सम्पूर्ण श्रावणी उपाकर्म का वैदिक विधि-विधान के अनुसार संचालन आचार्य अंकित दीक्षित द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन पर वैदिक मंत्रों के साथ हवन संपन्न कराया गया तथा सभी प्रतिभागियों को रक्षा सूत्र बांधा गया। कपीश्वर वैदिक गुरुकुल द्वारा आयोजित यह श्रावणी उपाकर्म न केवल प्राचीन वैदिक संस्कारों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं एवं सनातन संस्कारों से जोड़ने का भी एक प्रेरणादायी माध्यम है

वैदिक संस्कार में  36 प्रकार के पवित्र पदार्थों से अभिषेक कराया

गुरुकुल प्रमुख डॉ. विवेक तांगड़ी ने बताया कि इस विशेष वैदिक संस्कार में सम्मानित अतिथियों एवं बटुकों का 36 प्रकार के पवित्र पदार्थों से अभिषेक एवं स्नान कराया गया। इनमें दूध, दही, गौमूत्र, केवड़ा जल, गंगाजल, चंदन जल, गुलाब जल, गुर्च का जल, गन्ने का रस, अनार का रस, पंचगव्य, पंचधान्य, पंचामृत सहित अन्य पवित्र एवं वैदिक परंपरा में वर्णित पदार्थ सम्मिलित रहे। श्रावणी उपाकर्म आत्मशुद्धि एवं प्रायश्चित्त का एक महत्वपूर्ण वैदिक विधान है, जिसके माध्यम से मनुष्य द्वारा जाने-अनजाने में हुए दोषों एवं पापों के प्रायश्चित्त का संकल्प लिया जाता है। साथ ही यह संस्कार व्यक्ति को पुनः सदाचार, संयम, स्वाध्याय एवं धर्ममय जीवन के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है।वर्तमान समय में धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही वैदिक परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से कपीश्वर वैदिक गुरुकुल, लखनऊ के गुरुकुल प्रमुख डॉ. विवेक तांगड़ी के नेतृत्व में श्रावणी उपाकर्म का भव्य आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर कपीश्वर वैदिक गुरुकुल के 100 से अधिक बटुकों तथा अनेक गणमान्य अतिथियों ने प्रातःकालीन बेला में वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य श्रावणी उपाकर्म की विधियों को संपन्न किया।इस अवसर पर डॉ. पंकज सिंह भदौरिया,आत्मा प्रकाश मिश्र, ऋद्धि किशोर गौड़, रजत सक्सेना, मनीष शर्मा सहित अनेक गणमान्य अतिथि, बटुक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

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