
IPS वाई पूरन की मौत पर मायावती ने जताया गहरा दुख, समयबद्ध जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
BSP Chief Mayawati: हरियाणा में आईजी रैंक के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या ने पूरे दलित समाज में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। दलित संगठनों ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में चंडीगढ़ जाम करने की चेतावनी भी दी है। इसी बीच, बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस घटना पर कड़ा बयान जारी किया है।
मायावती का बयान
मायावती ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि पूरन कुमार और उनकी पत्नी, जो स्वयं हरियाणा की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, पर जातिवादी शोषण और प्रताड़ना का असर पड़ा। उन्होंने कहा कि यह घटना “पूरे देश को झकझोर कर रख देने वाली” है और दलित व बहुजन समाज के लोग इससे काफी उद्वेलित हैं।
हरियाणा राज्य में आईजी रैंक के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वाई. पूरन कुमार, जिनकी पत्नी भी स्वंय हरियाणा की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, द्वारा जातिवादी शोषण व प्रताड़ना के कारण की गयी आत्महत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। ख़ासकर दलित व बहुजन समाज के लोग काफी उद्वेलित हैं।…
— Mayawati (@Mayawati) October 11, 2025
सरकार के लिए शर्मनाक घटना
बसपा सुप्रीमो ने इसे अति-दुखद और अति-गंभीर घटना बताया और कहा कि यह एक सभ्य सरकार के लिए शर्मनाक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लाख दावों के बावजूद शासन-प्रशासन में जातिवाद का दंश हावी है और सरकार इसे रोक पाने में विफल साबित हुई है। मायावती ने यह भी कहा कि यह सब सरकार की नीति और नीयत की बात है।
यह भी पढ़ें…
Haryana: IPS अफसर Y पूरन कुमार ने खुद को मारी गोली, IAS पत्नी जापान दौरे पर
जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
मायावती ने समयबद्ध, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि आगे ऐसी घटनाएं न हों। उन्होंने हरियाणा सरकार से अनुरोध किया कि घटना को गंभीरता से लें और किसी भी तरह की लीपापोती से बचें। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार को भी उचित संज्ञान लेने की सलाह दी।
यह भी पढ़ें…
अखिलेश यादव का Facebook अकाउंट फिर से ऐक्टिव, ब्लॉक होने की वजह आई सामने
जातिवाद पर टिप्पणी
मायावती ने कहा कि ऐसी घटनाओं से उन लोगों को सीख लेनी चाहिए जो एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण को आर्थिक स्थिति से जोड़कर “क्रीमी लेयर” की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि धन और पद मिलने के बाद भी जातिवाद का दंश पीछा नहीं छोड़ता और हर स्तर पर जातिवादी शोषण, अत्याचार और उत्पीड़न लगातार जारी रहता है। हरियाणा की यह घटना इसका ताजा उदाहरण है।
यह बयान राज्य और केंद्र सरकार के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, जबकि दलित समाज इस मामले में न्याय और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
यह भी पढ़ें…





