सतगावां में गोबर क्राफ्ट से दीपावली की तैयारियां, महिलाओं ने बनाई पर्यावरण-सहायक सजावट

Deepawali 2025: झारखंड के के सतगावां प्रखंड के भखरा स्थित पहलवान आश्रम में दीपावली के लिए गोबर से बने दीये और गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों की तैयारियां जोरों पर हैं। मिट्टी के पारंपरिक दीयों और इलेक्ट्रॉनिक दीपकों की तुलना में गाय के गोबर से बने ये पर्यावरण अनुकूल उत्पाद कम ही लोगों को देखने को मिलते हैं।

गोबर क्राफ्ट: पर्यावरण और महिला सशक्तिकरण का संगम
पहलवान आश्रम में दीपावली और छठ पर्व को ध्यान में रखते हुए लगभग 15 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें दीये, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, द्वार झालर, शुभ-लाभ चिन्ह, स्वास्तिक, कप धूप, “शुभ दीपावली” और “जय छठी मैया” जैसी नेम प्लेट शामिल हैं। ये उत्पाद गोबर और लकड़ी के बुरादे से बनाए जाते हैं और धूप में सुखाकर आकर्षक रंगों से सजाए जाते हैं।

राष्ट्रीय झारखंड सेवा संस्थान के कोषाध्यक्ष विजय कुमार, नीतू कुमारी और ईशान चंद महतो ने गुजरात के भुज से प्रशिक्षण प्राप्त कर ग्रामीण महिलाओं को गोबर क्राफ्ट की तकनीक सिखाई। इस प्रशिक्षण ने महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और गौसंरक्षण में भी योगदान दिया।

दीपावली मेले में उत्पादों को मिली सराहना
संस्थान के सचिव मनोज दांगी ने बताया कि धनतेरस से लेकर दीपावली तक की पूरी तैयारी की गई है। हाल ही में रांची में आयोजित दीपावली मेले में इन उत्पादों को विशेष स्थान मिला और कई वरिष्ठ अधिकारियों ने सराहना के साथ खरीदारी भी की।

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पर्यावरण और गौसंरक्षण में योगदान
गोबर से बने ये उत्पाद रेडिएशन से बचाव में सहायक हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। साथ ही, दूध न देने वाली वृद्ध गायों के गोबर का उपयोग कर गौसंरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है।

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सतगावां: नक्सल प्रभावित क्षेत्र से महिला सशक्तिकरण का केंद्र
सतगावां प्रखंड, जो कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, आज गोबर क्राफ्ट के जरिए महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और गौसंरक्षण का केंद्र बन चुका है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के जीवन में उम्मीद और विकास की नई किरण लेकर आ रही है और विकसित भारत की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है।

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