
MLC चुनाव में चिराग का मास्टरस्ट्रोक, मुस्लिम चेहरे पर लगाया दांव…
Bihar MLC Election: बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। नौ सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपने उम्मीदवारों की तस्वीर लगभग साफ कर दी है। भाजपा और जदयू के बाद अब Chirag Paswan की पार्टी Lok Janshakti Party (Ram Vilas) ने भी अपने प्रत्याशी का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष अशरफ अंसारी को मैदान में उतारकर बिहार की सियासत में नया संदेश देने की कोशिश की है।
NDA ने तय किए सभी चेहरे
बिहार विधान परिषद की नौ सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है, जबकि नामांकन की अंतिम तारीख 11 जून निर्धारित की गई है। भाजपा और जदयू पहले ही अपने-अपने चार-चार उम्मीदवारों की घोषणा कर चुके हैं। इसके बाद एनडीए की सहयोगी लोजपा (रामविलास) ने अपने हिस्से की सीट पर अशरफ अंसारी को उम्मीदवार बनाकर गठबंधन की सूची पूरी कर दी।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक ने बताया कि केंद्रीय पार्लियामेंट्री बोर्ड ने अशरफ अंसारी के नाम को मंजूरी दी है। इसके साथ ही एनडीए के सभी नौ उम्मीदवारों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है।
मुस्लिम चेहरे पर चिराग का फोकस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अशरफ अंसारी को उम्मीदवार बनाना केवल एक सामान्य राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश है। बिहार की राजनीति लंबे समय से जातीय और सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में चिराग पासवान ने मुस्लिम समुदाय से आने वाले चेहरे को आगे कर यह संकेत देने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी सामाजिक विस्तार की दिशा में काम कर रही है।
अशरफ अंसारी को स्थानीय स्तर पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता माना जाता है और पार्टी संगठन में भी उनकी पकड़ मजबूत बताई जाती है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए लोजपा (रामविलास) अल्पसंख्यक वोट बैंक में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है।
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भाजपा-जदयू ने भी साधे सामाजिक समीकरण
इस चुनाव में भाजपा और जदयू ने भी सामाजिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिया है। भाजपा ने भोजपुरी स्टार पवन सिंह समेत कई चर्चित चेहरों को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जदयू ने महिलाओं और अतिपिछड़ा वर्ग को प्रतिनिधित्व देकर अपना सामाजिक संदेश देने की कोशिश की है। Pawan Singh को भाजपा का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद चुनावी मुकाबला और चर्चाओं में आ गया है।
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विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संकेत
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक विधान परिषद चुनाव भले सीमित सीटों का चुनाव हो, लेकिन इसके जरिए सभी दल आगामी बिहार विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार कर रहे हैं। एनडीए के भीतर सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन में सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता दिए जाने से साफ है कि गठबंधन अभी से व्यापक वोट बैंक साधने में जुट गया है।
चिराग पासवान के लिए भी यह चुनाव राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। हाल के वर्षों में उन्होंने खुद को बिहार की नई राजनीति के बड़े चेहरे के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है। ऐसे में अशरफ अंसारी को उम्मीदवार बनाना उनकी राजनीति को नए सामाजिक दायरे तक पहुंचाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
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