अब महिलाएं रात की शिफ्ट में भी कर सकेंगी काम, जम्मू-कश्मीर सरकार लाएगी संशोधन विधेयक

Jammu & Kashmir News: जम्मू-कश्मीर में महिलाओं को रोजगार के क्षेत्र में अधिक स्वतंत्रता देने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने महिलाओं के रात में काम करने पर लगे पुराने प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव आगामी विधानसभा सत्र में पेश किए जाने वाले “दुकानें और प्रतिष्ठान (संशोधन) विधेयक” का हिस्सा है।

महिलाओं को मिलेगी समान कार्य स्वतंत्रता
नए विधेयक के तहत महिलाएं अब अपनी इच्छा और सहमति से रात के समय भी कार्य कर सकेंगी। सरकार का कहना है कि यह संशोधन महिलाओं को समान अवसर और कार्यस्थल पर अधिक स्वतंत्रता प्रदान करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के उन मानकों के अनुरूप है, जिनमें लिंग आधारित कार्य प्रतिबंधों को समाप्त करने की सिफारिश की गई है।

दुकानों और प्रतिष्ठानों के समय में लचीलापन
विधेयक में दुकानों और प्रतिष्ठानों के खुलने-बंद होने के समय पर लगे प्रतिबंधों को भी हटाने का प्रस्ताव है। इससे निजी क्षेत्र में कार्य घंटे अधिक लचीले होंगे और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का कहना है कि कार्य समय का निर्धारण अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप किया जाएगा ताकि श्रमिकों के अधिकारों की भी रक्षा हो सके।

विधानसभा में पेश होंगे अन्य विधेयक
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी इस विधेयक को विधानसभा में पेश करेंगे। वहीं ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री जावीद अहमद डार “जम्मू-कश्मीर पंचायती राज अधिनियम, 1989” में संशोधन संबंधी विधेयक पेश करने जा रहे हैं। इस संशोधन के तहत राज्य चुनाव आयुक्त की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष करने का प्रावधान किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह बदलाव उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के मॉडल के अनुरूप है।

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विधिक शिक्षा को नई दिशा
विधानसभा सत्र के एजेंडे में जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (National Law University, Srinagar) की स्थापना से जुड़ा प्रस्ताव भी शामिल है। इससे प्रदेश में विधिक शिक्षा और न्यायिक अनुसंधान को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
महिलाओं को रात में काम करने की अनुमति देने का यह निर्णय जम्मू-कश्मीर में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे पर्यटन, आतिथ्य, आईटी, और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से प्रदेश में रोजगार के अवसरों का दायरा बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

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