
Gold Loan में बड़ा फर्जीवाड़ा… नकली सोने के सहारे 7.14 लाख की ठगी
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में बैंकिंग सिस्टम को चकमा देकर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक जालसाज ने नकली सोना गिरवी रखकर Bank of India से 7.14 लाख रुपये का गोल्ड लोन हासिल कर लिया। मामले में बैंक के वैल्यूवर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिसके बाद दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
कैसे हुआ पूरा खेल?
जानकारी के अनुसार, माल थाना क्षेत्र के करेंद निवासी संतोष कुमार ने 27 फरवरी 2023 को बैंक ऑफ इंडिया की गहदो शाखा में गोल्ड लोन के लिए आवेदन किया।
लोन प्रक्रिया के तहत बैंक के अधिकृत वैल्यूवर (सराफ) ने जमा किए गए जेवरों की जांच कर उन्हें 22 कैरेट शुद्ध सोना बताते हुए रिपोर्ट दे दी। इसी रिपोर्ट के आधार पर बैंक ने 7.14 लाख रुपये का लोन मंजूर कर दिया।
किस्त न चुकाने पर खुला राज
कुछ समय बाद जब लोन की किस्तें जमा नहीं हुईं, तो बैंक ने नियमानुसार नोटिस जारी किया और गिरवी रखे गए जेवरों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की।
नीलामी से पहले जेवरों की दोबारा जांच कराई गई, जिसमें दूसरे वैल्यूवर ने उन्हें पूरी तरह नकली बताया। यहीं से पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
बैंक की शिकायत और FIR
मामले का खुलासा होने के बाद शाखा प्रबंधक अभिजीत शुक्ल ने रहीमाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने:
लोन लेने वाले संतोष कुमार
और जेवरों का मूल्यांकन करने वाले वैल्यूवर
दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश की धाराओं में FIR दर्ज की है।
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पुलिस जांच में क्या सामने आ सकता है?
थाना प्रभारी अरुण कुमार त्रिगुणायक के अनुसार:
पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है
यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इसमें कोई बड़ा गिरोह शामिल है
वैल्यूवर की भूमिका और संभावित मिलीभगत की जांच भी हो रही है
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बैंकिंग सिस्टम पर सवाल
इस घटना ने गोल्ड लोन प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या वैल्यूवर की जांच प्रणाली पर्याप्त मजबूत है?
- क्या बैंक के अंदरूनी सत्यापन में कमी रही?
- क्या इस तरह के मामलों को रोकने के लिए सख्त नियमों की जरूरत है?
लखनऊ में सामने आया यह मामला सिर्फ एक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की एक बड़ी चूक को उजागर करता है। नकली सोने के जरिए लाखों का लोन लेना और वैल्यूवर की भूमिका संदिग्ध होना इस बात का संकेत है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करना होगा। पुलिस जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह एक अकेले व्यक्ति की करतूत है या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा।
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